बुद्धा राइस, जिसे कालानामक चावल भी कहा जाता है, भारत की एक प्राचीन और खास किस्म है. यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बस्ती और आसपास के क्षेत्रों में उगाया जाता है. इसकी खुशबू, स्वाद और पोषण मूल्य इसे आम चावल से बिल्कुल अलग बनाते हैं. मान्यता है कि यह चावल गौतम बुद्ध के समय से जुड़ा हुआ है, इसी वजह से इसे बुद्धा राइस कहा जाने लगा. आज के समय में जब लोग हेल्दी और पोषक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, तब बुद्धा राइस को सुपरफूड के रूप में पहचाना जा रहा है.
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, पोषण की बात करें तो बुद्धा राइस नॉर्मल सफेद चावल की तुलना में कहीं ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा सामान्य चावल से अधिक होती है, जो शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने, खून की कमी दूर करने और शरीर को अंदर से ताकत देने में सहायक होते हैं. यही वजह है कि इसे रोजाना के संतुलित आहार में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है.
बुद्धा राइस का एक बड़ा फायदा इसका कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होना है. इसका मतलब यह है कि इसे खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता. इसी कारण यह डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए नॉर्मल चावल की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है. साथ ही इसमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है, कब्ज की समस्या से राहत देता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है. जो लोग वजन घटाने या वजन कंट्रोल में रखना चाहते हैं, उनके लिए भी यह चावल उपयोगी साबित हो सकता है.
स्वाद और खुशबू के मामले में भी बुद्धा राइस काफी खास है. पकने के बाद इसके दाने हल्के, नरम और खुशबूदार हो जाते हैं, जो खाने का अनुभव और बेहतर बना देते हैं. इसका स्वाद थोड़ा नट्टी और मिट्टी जैसा होता है, जो साधारण चावल से अलग और ज्यादा आकर्षक लगता है. यही कारण है कि इसे खिचड़ी, पुलाव, सादा चावल या फिर खास व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है.
खेती के लिहाज से भी बुद्धा राइस खास माना जाता है. पारंपरिक तौर पर इसकी खेती में केमिकल खाद और कीटनाशकों का कम इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह ज्यादा प्राकृतिक और सेहतमंद रहता है. यही वजह है कि आज हेल्थ कॉन्शस लोग और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स इसे डेली डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं. कुल मिलाकर, बुद्धा राइस न सिर्फ पोषण से भरपूर है, बल्कि यह नॉर्मल चावल की तुलना में स्वाद, खुशबू और सेहत तीनों के लिहाज से एक बेहतर विकल्प साबित होता है.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-buddha-or-kalanamak-rice-produced-in-uttarpradesh-superfood-top-in-taste-nutrition-and-health-ws-ekl-10089107.html
