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कफ सिरप को ‘ओटीसी’ सूची से हटाएगी सरकार, एम्स के पूर्व निदेशक ने बताया क्या होगा इसका असर center planning to remove cough syrup from otc list due to children death from adulteration aiims former chief dr mc mishra explains

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कुछ दिन पहले कई राज्‍यों में म‍िलावटी कफ स‍िरप पीने से हुई बच्‍चों की मौत के बाद केंद्र सरकार कफ सिरप को ओटीसी सूची से हटाने की योजना बना रही है. इस सूची में उन दवाओं को रखा जाता है जो ब‍िना डॉक्‍टरी पर्चे के भी खरीदी और बेची जाती हैं, लेक‍िन इसके नुकसानों को देखते हुए अब इसमें बदलाव हो सकता है. आइए जानते हैं सरकार के इस कदम पर एम्‍स नई द‍िल्‍ली के पूर्व न‍िदेशक डॉ. एमसी म‍िश्र क्‍या कहते हैं?

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कफ स‍िरप को लेकर अब केंद्र सरकार सख्‍ती बरत रही है और इन्‍हें ओटीसी सूची से हटाने पर व‍िचार कर रही है.

Cough Syrup Deaths: कई राज्यों में मिलावटी कफ सिरप पीने से होने वाली दर्जनों बच्चों की मौत के बाद अब केंद्र सरकार कफ सिरप को लेकर सख्त हो गई है. सरकार इसे ओटीसी सूची से हटाने की योजना बना रही है. ओटीसी सूची से हटने का मतलब है कि कम सख्त लाइसेंसिंग और निर्माण मानकों के साथ यह दवा अब ओवर द काउंटर नहीं नहीं बेची जा सकेगी.

सरकार ने 19 दिसंबर को जारी एक अधिसूचना में ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-के में कफ दवाओं की सूची से ‘सिरप’ शब्द को हटाने का प्रस्ताव दिया है. बता दें कि इस अनुसूची में वे दवाएं आती हैं जिन्हें बेचने के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के कुछ सख्त नियमों से छूट मिलती है, साथ ही खरीदने के लिए डॉक्टरी प्रिस्क्रिप्शन या पर्चे की जरूरत नहीं पड़ती.

इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के बाद सलाहकार समिति की बैठक में विशेषज्ञों ने माना कि कफ सिरप अनुसूची-K का हिस्सा होने के कारण आसानी से बेचा और खरीदा जाता है. यह भी देखा गया कि लोगों के बीच कफ सिरप की गलत बिक्री और सेवन हो रहा था.साथ ही गोलियों के मुकाबले सिरप का सॉल्वेंट दूषित होने की संभावना ज्यादा होती है, ऐसे में समिति ने पहले कफ सिरप को पर्चे पर मिलने वाली दवा बनाने का सुझाव दिया था. बता दें कि फिलहाल इस पर सरकार ने एक महीने के अंदर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं.

इस बारे में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक डॉ. एम श्री मिश्र का कहना है कि कफ सिरप को ओटीसी से हटाना जरूरी है और अच्छा कदम है. सिर्फ कफ सिरप ही नहीं कई और भी ऐसी दवाएं हैं जो लोग बिना पर्चे के खरीदते और कैमिस्ट बेचते हैं, जैसे दर्द निवारक दवाएं आदि.जबकि कायदे से सभी दवाओं के लिए डॉक्टरों का प्रिस्क्रिप्शन होना चाहिए.

वहीं दूसरी जरूरी बात ये है कि दवाओं पर रेगुलेशन और सख्त नियम बहुत जरूरी हैं. सिर्फ दवाओं की बिक्री और खरीद ही नहीं बल्कि इनकी मैन्यूफैक्चरिंग, रखरखाव और गुणवत्ता को लेकर भी नियम बनाने और उन्हें सख्ती से लागू कराना चाहिए. यहां समस्या ये है कि नियम तो बन जाते हैं लेकिन वे उतनी सख्ती और ईमानदारी से लागू नहीं होते.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि सिर्फ पैरासीटामोल ही ऐसी दवा है तो ओवर द काउंटर खरीदी या बेची जा सकती है, लेकिन बच्चों के मामले में इससे भी समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि अगर यही दवा जो सबसे सुरक्षित है और बच्चों को इसकी ज्यादा मात्रा दे दी जाए तो गंभीर नुकसान हो सकते हैं, इसलिए दवाओं पर नियंत्रण बेहद जरूरी है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.Bharat.one.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

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