शादी होते ही अक्सर कपल्स से सवाल पूछा जाता है कि बच्चा कब करोगे. लोग हर चीज की प्लानिंग करते हैं लेकिन बच्चे की प्लानिंग नहीं करते. बच्चा पैदा करने से पहले हर कपल को उसकी प्लानिंग करनी जरूरी है. कई कपल्स कंसीव का सही समय नहीं जानते तो कुछ कपल्स अपने खराब लाइफस्टाइल की वजह से कंसीव नहीं पाते. वहीं, आजकल की तनाव भरी जिंदगी में बच्चे का खर्चा उठाना आसान नहीं है. इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए खुद को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर तैयार करना बहुत जरूरी है.
बेबी प्लान से पहले हेल्थ पर गौर करें
बच्चा कब करना, यह कपल्स का अपना निजी फैसला होता है. कोई शादी के तुरंत बाद ही मम्मी-पापा बनना चाहता है तो कोई पहले अपने जीवनसाथी को समझना चाहता हैं. लेकिन जो कपल बेबी की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें अपनी सेहत पर ध्यान देना जरूरी है. महिलाओं को बच्चे के बारे में सोचने से पहले गायनेकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए. साथ ही कुछ टेस्ट करवाने चाहिए. इसमें ब्लड टेस्ट, एब्डोमन का अल्ट्रासाउंड, AMH टेस्ट समेत कई टेस्ट शामिल होते हैं. पेट के निचले हिस्से के अल्ट्रासाउंड से महिलाओं के प्रजनन अंगों की स्थिति पता चलती है, AMH यानी एंटी मुलरियन हार्मोन टेस्ट से ओवरी में एग की संख्या और फर्टिलिटी का पता चलता है. महिलाओं में PAP स्मियर टेस्ट करवाया जाता ताकि सर्वाइकल कैंसर का पता चल सके. वहीं हस्बैंड-वाइफ दोनों का यूरिन और ब्लड टेस्ट होता है जिससे डायबिटीज, थैलेसीमिया, रूबेला, चिकन पॉक्स, हर्पीज, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी और थायइड डिस्फंक्शन का पता चल सके. इसके अलावा जेनेटिक डिसऑर्डर स्क्रीनिंग भी की जाती है.
महिलाओं को कैल्शियम और आयरन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए (Image-Canva)
ओव्यूलेशन का रखें ध्यान
अधिकतर महिलाएं ओव्यूलेशन से अनजान होती हैं. इस समय कंसीव करना बहुत आसान होता है. हर महिला को कैलेंडर पर अपने पीरियड्स के शुरू होने की तारीख नोट करनी चाहिए. जिस दिन पीरियड्स शुरू हुए, उसी दिन से मेंस्ट्रुअल साइकिल शुरू होती है. अगले महीने शुरू हुए पीरियड्स की तारीख और पिछले महीने पीरियड्स का पहला दिन, इन दोनों के बीच दिन को गिने, जितने दिन की गिनती होगी, वह महिला की मेंस्ट्रुअल साइकिल कहलाती है. यह 28 से 35 दिन की होती है. अगर महिला की मेंस्ट्रुअल साइकिल 28 दिन की है तो 14वां दिन उनका ओव्यूलेशन होगा. इस दौरान ओवरी से एग रिलीज होता है. इस समय अगर महिला पति से संबंध बनाती है तो गर्भ ठहर सकता है.
प्लानिंग से 3 महीने पहले शुरू करें फोलिक एसिड
गायनेकोलॉजिस्ट हुमा अली कहती हैं कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी का सोच रही है, उन्हें 3 महीने पहले ही फोलिक एसिड से भरपूर डाइट शुरू कर देनी चाहिए. खाने में संतरा, मौसमी, आंवला, हरी सब्जी, बींस, बाजार, ज्वार, रागी, दलिया जैसी चीजें शामिल करनी चाहिए. दरअसल फॉलिक एसिड भ्रूण के विकास के लिए जरूरी है. कंसीव करने से पहले फोलिक एसिड प्रजनन अंगों को मजबूत बनाता है. प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीने जोखिम से भरे होते हैं. ऐसे में फॉलिक एसिड बच्चे के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है. प्रेग्नेंसी ठहरने के 2 हफ्ते के अंदर भ्रूण में न्यूरल ट्यूब बन जाती है. इस ट्यूब से बच्चे की रीढ़ की हड्डी, नसें और दिमाग का विकास होता है. जो महिलाएं डायबिटीज या मोटापे का शिकार हैं, उन्हें बेबी प्लान करने से पहले फोलिक एसिड शुरू कर देना चाहिए.
पुरुष करें बॉडी डिटॉक्स
महिलाओं के साथ ही पुरुषों को भी अपनी सेहत पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि अगर उनके स्पर्म कम हो या उनकी क्वॉलिटी खराब हो तो वह पिता बनने की खुशी से दूर हो सकते हैं. पुरुषों को भी पत्नी के साथ-साथ अपनी डाइट और लाइफस्टाइल को बदलने की जरूरत है. प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले पुरुषों को डाइट में प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट लेनी चाहिए. पुरुषों में स्पर्म 84 दिन में मैच्योर होता है इसलिए उन्हें 3 महीने पहले स्मोकिंग, तंबाकू और शराब का सेवन छोड़ देना चाहिए. डाइट में उड़द की दाल और सूखे मेथी के दाने शामिल करने चाहिए. इससे टेस्टोस्टेरोन की क्वॉलिटी सुधरती है.
प्रेग्नेंसी के लिए कपल्स को स्ट्रेस से दूर रहना चाहिए (Image-Canva)
एक्सरसाइज पर दें ध्यान
बेबी प्लान करने से पहले कपल्स को एक्सरसाइज शुरू कर देनी चाहिए. कपल्स हर रोज 1 से 2 किलोमीटर वॉक करनी चाहिए. चूंकि महिलाओं को 9 महीने तक बच्चे को अपनी कोख में पालना होता है इसलिए उनके शरीर के अंग मजबूत होने जरूरी है. रोज कार्डियो करें जैसे जॉगिंग, साइक्लिंग या स्वीमिंग. प्रेग्नेंसी में पेल्विक फ्लोर पर जोर पड़ता है. अगर यह कमजोर हो तो दिक्कत हो सकती है इसलिए पेल्विक मसल्स को स्ट्रांग बनाने के लिए इससे जुड़ी एक्सरसाइज करें. इसमें स्क्वाट्स, हील स्लाइड, हैप्पी बेबी पोजीशन आती हैं. प्लैंक, पिलाटे या योग भी कर सकती हैं. साथ में ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी करें. बच्चे की डिलीवरी के समय इससे लेबर पेन में फायदा होता है.
फाइनेंस पर रखें नजर
अक्सर कुछ लोग यह कहते हैं कि बच्चा पैदा करना बच्चों का खेल नहीं है. यह हकीकत है. बेबी प्लान करने से पहले अपनी फाइनेंशियल कंडीशन पर गौर करना जरूरी है. महंगाई के जमाने में बच्चे के कंसीव होने से लेकर उसकी डिलीवरी का खर्चा, लाखों रुपए में होता है. प्राइवेट अस्पताल में 9 महीने की दवाएं, इंजेक्शन, अल्ट्रासाउंड, डॉक्टर की फीस और बच्चे की डिलीवरी का खर्च 3 से 5 लाख में आता है. अगर नॉर्मल डिलीवरी है तो 55 हजार से 1 लाख रुपए लगते हैं और अगर C सेक्शन डिलीवरी हो तो खर्चा 2 लाख रुपए तक हो सकता है. शहर और अस्पतालों के हिसाब से यह रेट अलग-अलग हो सकते हैं.
FIRST PUBLISHED : December 15, 2024, 16:25 IST
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