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धूप में बैठने का सही तरीका क्‍या है? विटामिन D की कमी से बिगड़ सकता है थायरॉइड, घट जाएगी इम्यूनिटी

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Explainer- थायरॉइड की बीमारी एक ऐसी समस्या है जो जिंदगी भर ठीक नहीं होती. भारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है. थायरॉइड बिगड़ जाए तो बहुत सी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. अगर इससे जुड़ी बीमारी हो तो…और पढ़ें

धूप में बैठने का सही तरीका क्‍या है? विटामिन D की कमी से बिगड़ सकता है थायरॉइड

अगर थायरॉइड ठीक से काम ना करे तो इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है (Image-Canva)

भारत में थायरॉइड के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसा होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण है खराब लाइफस्टाइल. आजकल लोग जंक फूड या रेडी टू कुक फूड ज्यादा खाने लगे हैं जिसमें सोडियम की मात्रा हद से ज्यादा होती है. वहीं स्मोकिंग से भी थायरॉइड ग्लैंड प्रभावित होते हैं. इन सबके अलावा थायरॉइड तब भी गड़बड़ होता है, जब शरीर में विटामिन डी की कमी हो. 

क्या है थायरॉइड
गुरुग्राम के पारस हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि थायरॉइड एक ग्रंथि है जो गले में तितली के आकार की होती है. यह 2 इंच लंबी होती है. इसमें से थायरॉइड हार्मोन रिलीज होता है जो बॉडी के मेटाबॉलिज्म, मूड और वेट को कंट्रोल करता है. इसी हार्मोन से शरीर को एनर्जी मिलती है और शरीर का तापमान बरकरार रहता है. अगर थायरॉइड ग्लैंड से कम या ज्यादा हार्मोन रिलीज हों तो इसका असर शरीर पर पड़ता है. जब इस ग्लैंड से कम हार्मोन रिलीज होते हैं तो इसे हाइपो थायरॉइडिज्म कहते हैं. इससे शरीर जल्दी थक जाता है. टेस्ट करवाया जाए तो T3 और T4 का लेवल कम हो जाता है और TSH यानी थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन बढ़ जाता है. वहीं, जब ग्लैंड से ज्यादा हार्मोन निकलने लगे तो इसे हाइपर थायरॉइडिज्म कहते हैं.  

हाइपो और हाइपर थायरॉइडिज्म के लक्षण
अगर हाइपो थायरॉइडिज्म हो तो वजन बढ़ने लगता है. खूब एक्सरसाइज या डाइट के बाद भी वजन कम नहीं होता. शरीर में थकान, कमजोरी और आलस महसूस होता है. भूख नहीं लगती, ठंड बहुत लगती है और नींद भी ज्यादा आती है. वहीं महिलाओं की मेंस्ट्रुअल साइकिल गड़बड़ हो जाती है और प्रेंग्नेंट होने में भी दिक्कत हो सकती है. हाइपर थायरॉइडिज्म में भूख बहुत लगती है और वजन तेजी से कम होता है. व्यक्ति मूड स्विंग का शिकार होता है, बहुत ज्यादा गर्मी लगती है और हाथ-पैर कांपते भी हैं. 

थायरॉइड हार्मोन्स हार्ट रेट और ब्रेन डेवलपमेंट को भी प्रभावित करते हैं (Image-Canva)

प्रेग्नेंसी के दौरान गड़बड़ होता है थायरॉइड
अक्सर प्रेग्नेंसी में महिलाएं हाइपो थायरॉइडिज्म की शिकार हो जाती है. जांच कराने पर TSH का लेवल बढ़ा हुआ मिलता है. इस दौरान थायरॉइड के कोई लक्षण नजर नहीं आते लेकिन इससे मिसकैरेज की संभावना बढ़ जाती है.  

विटामिन डी की कमी की वजह से हो सकता है
अगर शरीर में विटामिन डी की कमी हो तो थायरॉइड का बैलेंस गड़बड़ हो सकता है. थायरॉइड को सुधारने के लिए विटामिन डी का लेवल बढ़ाना जरूरी है. दरअसल विटामिन डी से थायरॉइड हार्मोन्स को सपोर्ट मिलता है. जब बॉडी में भरपूर मात्रा में विटामिन डी हो तो मेटाबॉलिज्म दुरुस्त रहता है और बॉडी में एनर्जी बनी रहती है. बॉडी में विटामिन डी बेहद कम हो तो थायरॉइड कैंसर, हशिमोटो थायरॉइडिटिस और ग्रेव्स बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है. 

मूड स्विंग नहीं सताएंगे
थायरॉइड से मूड स्विंग बढ़ते हैं और तनाव भी घेर लेता है. वहीं विटामिन डी बॉडी में हैप्पी हार्मोन्स को रिलीज करता है. इससे दिमाग में सेरोटोनिन रिलीज होता है जो थायरॉइड से होने वाले स्ट्रेस को कम करता है. सूरज में बैठने से विटामिन डी की कमी दूर होती है और सूरज की रोशनी में इतनी ताकत होती हैं कि शरीर में मौजूद हर गड़बड़ी को दुरुस्त कर देती है क्योंकि हमारे शरीर की जैविक घड़ी सूरज से ही चलती है. 

इम्यूनिटी बढ़ने लगती है
इम्यूनिटी घटते ही थायरॉयड का लेवल बिगड़ने लगती है. वहीं विटामिन डी इम्यूनिटी को बढ़ाता है. ऐसे में हर रोज धूप में कुछ घंटा बैठा जाए तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है और थायरॉइड को कंट्रोल किया जा सकता है. धूप में सुबह 8 से 9 बजे के बीच बैठें और हमेशा पीठ करके धूप सेकें. इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखें कि बॉडी पर सनस्क्रीन लोशन लगा हो. 

थायरॉइड की गड़बड़ी से पाचन क्रिया बिगड़ने लगती है (Image-Canva)

ऐसे होगा थायरॉइड कंट्रोल
अगर बॉडी में विटामिन डी बेहद कम है तो इसके लिए डॉक्टर सैशे लेने की सलाह देते हैं. इसके अलावा खाने में सेल्मन, टूना मछली, एग, योगर्ट, अनाज, फल और सब्जियों को शामिल करें. इस दौरान आयोडीन का सेवन बढ़ाएं क्योंकि इससे थायरॉइड हार्मोन अच्छे से रिलीज होते हैं. रूटीन में कार्डियो एक्सरसाइज को शामिल करें जैसे ब्रिस्क बॉक, रनिंग, साइकलिंग, स्विमिंग. इससे मेटाबॉलिज्म ठीक होता है.

जानलेवा भी हो सकती है यह बीमारी
थायरॉइड कार्डियोवेस्कुलर और नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखता है. थायरॉयड की मदद से सर्कुलेटरी सिस्टम से दिल सही मात्रा में खून को पंप कर पाता है. इससे दिल की धड़कनें सही रहती हैं. अगर थायरॉइड बिगड़ जाए तो दिल का काम प्रभावित होता है. वहीं हाइपोथायरॉइडिज्म में शरीर से सोडियम की मात्रा कम हो जाती है जिससे इंसान कोमा में भी पहुंच सकता है. समय पर इस बीमारी का इलाज ना हो तो व्यक्ति कैंसर तक का भी शिकार हो सकता है.

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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-what-is-the-connection-between-thyroid-and-vitamin-d-how-to-reduce-thyroid-levels-8962374.html

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