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25 मिनट की है ट्रिक, क्या बचाकर रख सकती है हार्ट अटैक के मरीज की जान? डॉक्टर से 2 मिनट में जानिए कितनी है कारगर

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Health Tips: हर किसी को ये जानकारी होना जरूरी है. अधिकतर बार देखा जाता है, कि हार्ट अटैक से मरीज की जान चली जाती है, जिसका कारण होता है उसे सही समय पर उपचार न मिलना, क्योंकि कुछ मामले ऐसे देखे जाते हैं, जिसमें …और पढ़ें

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जानकारी देते डॉ. पंकज कुमार सिंह 

हाइलाइट्स

  • सीपीआर की जानकारी हर किसी को होनी चाहिए.
  • हार्ट अटैक के मरीजों की जान सीपीआर से बचाई जा सकती है.
  • सीपीआर देने से ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन बनी रहती है.

बेगूसराय: देश में हर साल तकरीबन 7 लाख लोगों को हार्ट अटैक आने पर सीपीआर की जरूरत पड़ती है. इसमें से लगभग 5 लाख लोगों की जान चली जाती है. आमतौर पर हार्ट अटैक के लक्षण धीरे-धीरे दिखते रहते हैं . लेकिन कार्डियक अरेस्ट तो वक्त ही नहीं देता. यह एकदम अचानक आता है और बहुत खतरनाक स्थिति पैदा कर देता है .इसके लक्षणों को पहचानकर मरीज को तुरंत एक चीज देनी होती है, जिससे कुछ हद तक मदद मिल सकती है. वही चीज सीपीआर कहलाती है . हालांकि बेगूसराय सहित प्रदेश में बढ़ते कार्डियक अरेस्ट के मामले को लेकर CPR चर्चा में आया है. IGMS के डॉ. रत्नेश चौधरी ने भी सीपीआर की ट्रेनिंग आमलोगों तक पहुंच सके. इसके लिए प्रयास शुरू कर दिया है . Bharat.one पर आइए जानते हैं कार्डियक अरेस्ट का सीपीआर कनेक्शन, आखिर ये कैसे दिया जाता है


सीपीआर जान बचाने का एक मात्र साधन 

कार्डियक अरेस्ट के मरीज की जान समय पर सीपीआर नहीं मिलने की वजह से हो जाती है. हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में सीपीआर नहीं मिलने से मरीजों की जान जाने के मामले सबसे ज्यादा सामने आएं हैं. बेगूसराय में IMA सचिव सह हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया सीपीआर दिल को कुछ देर तक बचाकर रखती है और फिर डॉक्टर अपना काम शुरू कर देते हैं . अक्सर इसी की कमी के कारण डॉक्टर तक पहुंचने तक मरीज की जान चली जाती है.

सीपीआर देने से क्या होता है
डॉ . पंकज कुमार सिंह ने Bharat.one से बताया कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन सीपीआर को लेकर किताबी सलाह 20 से 25 मिनट तक ही है. लेकिन हमने देखा है 40 मिनट तक कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन करने के बाद मरीजों में जान आई है. इन्होंने बताया सीपीआर कोई भी सीख सकता है और सभी को सीखना चाहिए. हार्ट के जरिए सांस लेना बंद करने के चार से छह मिनट बाद मस्तिष्क की मृत्यु हो जाती है. सीपीआर प्रभावी ढंग से ब्लड फ्लो को बनाए रखता है और मस्तिष्क और अन्य जरूरी अंगों को ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे पीड़ित को पूरी तरह से ठीक होने का बेहतर मौका मिलता है.

कैसे दें सीपीआर 
सीपीआर चेस्ट कंप्रेशर करते वक्त यदि एक व्यक्ति सीपीआर दे रहा है, तो 30 कंप्रेशर के बाद 2 बार माउथ टू माउथ एयर देना होता है. यदि दो है तो 15 कंप्रेशर के बाद माउथ टू माउथ कंप्रेशर देना होता है. यह कंप्रेशर दो मिनट तक चलने के बाद मरीजों का बीपी आदि जांच करना होता है. सीपीआर एक मिनट में 100 से 120 बार देनी होती है .

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वो 25 मिनट की ट्रिक, क्या बचा सकती है हार्टअटैक के मरीज की जान, डॉक्टर से जाने

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.


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