आज के समय में पहले की तुलना में लोग बहुत ही ज्यादा मोबाइल फोन और डिजिटल गैजेट का उपयोग कर रहे हैं. जिसके कारण आंखों पर बहुत ही ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है. हालांकि, क्या आपने कभी सोचा डायबिटीज का आंखों पर भी प्रभाव पड़ सकता है. बता दें कि डायबिटीज से रेटिना (आंख की प्रकाश-संवेदनशील परत) की छोटी रक्त वाहिकाएं (Small blood vessels) प्रभावित हो सकती हैं. यह रक्त वाहिकाएं समय के साथ हाई ब्लड शुगर के कारण क्षतिग्रस्त (Damaged) हो जाती हैं, जिससे दृष्टि पर खतरा (Threat to vision) मंडराता है. बता दें कि डॉ. चित्रा एस, कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, रामैया मेमोरियल हॉस्पिटल, बेंगलुरु कहती हैं, “डायबिटीज का प्रभाव शुरुआत में मामूली होता है, लेकिन नियमित जांच और सही प्रबंधन से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है. नियमित आंखों की जांच से लंबे समय तक दृष्टि हानि (visual impairment) को टाला जा सकता है.”
डायबिटीज से आंखों पर होने वाले प्रभाव (effects of diabetes on eyes):
1. रेटिनोपैथी (Retinopathy): हाई ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को कमजोर कर देता है, जिससे धुंधली दृष्टि (Blurred vision), रात में देखने में दिक्कत या इलाज न होने पर पूरी दृष्टि खोने का खतरा रहता है.
2. डायबिटिक मैक्युलर एडीमा (DME): मैक्युला (रेटिना का केंद्रीय हिस्सा) में तरल (liquid) भरने के कारण यह स्थिति होती है. इससे पढ़ने और चेहरों को पहचानने में कठिनाई हो सकती है. समय पर इलाज न होने पर यह स्थिति खराब हो सकती है.
3. कैटरेक्ट (Cataracts): डायबिटीज से पीड़ित लोगों में मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, यह स्थिति बिना डायबिटीज वाले लोगों की तुलना में जल्दी विकसित हो सकती है.
4. ग्लूकोमा (Glaucoma): डायबिटीज के कारण आंखों के दबाव (eye pressure) में वृद्धि होती है, जिससे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है. अगर इसका सही समय पर इलाज न हो तो यह स्थायी दृष्टि हानि (permanent vision loss) का कारण बन सकता है.
5. धुंधली या अचानक दृष्टि बदलना: ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है, जो आंखों के फोकस पर असर डालती है.
क्यों ज़रूरी है नियमित आंखों की जांच?
बता दें कि डायबिटिक रेटिनोपैथी या मैक्युलर एडीमा जैसी समस्याओं के शुरुआती लक्षण नहीं दिखते. नियमित जांच से इन समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है. इस पर डॉ. चित्रा एस कहती हैं, “इन स्थितियों का इलाज लेजर थेरेपी या इंजेक्शन से किया जा सकता है. शुरुआती इलाज दृष्टि को संरक्षित रखने और जटिलताओं (Complications) को रोकने में मदद करता है.”
स्वस्थ आंखों के लिए सुझाव (Tips for healthy eyes):
ब्लड शुगर कंट्रोल करें: ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर बनाए रखना आंखों को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है.
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण: उच्च रक्तचाप (high blood pressure) और कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन भी आंखों की सेहत के लिए ज़रूरी है.
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नियमित आंखों की जांच: डायबिटिक जटिलताओं (Diabetic Complications) का समय रहते पता लगाने के लिए आंखों की नियमित जांच करवाएं.
समय रहते कदम उठाएं
अगर जल्दी इलाज किया जाए, तो डायबिटिक रेटिनोपैथी और मैक्युलर एडीमा जैसी स्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है. डॉ. चित्रा कहती हैं, “रोजमर्रा की आदतों और नियमित जांच से आंखों की समस्याओं से बचा जा सकता है और दृष्टि लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है.”
FIRST PUBLISHED : December 4, 2024, 15:23 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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