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Human Body Temperature: 95°F से नीचे तापमान जाने की स्थिति को हाइपोथर्मिया कहा जाता है, जो आम तौर पर खतरनाक मानी जाती है.इंसान होमियोथर्म होते हैं, यानी हमारे शरीर का तापमान सामान्यत 98.6°F के आसपास रहता है. यही टेंपरेचर ऑर्गन और ब्रेन के सही ढंग से काम करने के लिए जरूरी है.
इंसान होमियोथर्म होते हैं, यानी हमारे शरीर का तापमान सामान्यत 98.6°F के आसपास रहता है. यही टेंपरेचर ऑर्गन और ब्रेन के सही ढंग से काम करने के लिए जरूरी है. लेकिन जब शरीर का टेंपरेचर इस सीमा से नीचे गिरने लगता है, तो शरीर का नेचुरल सेफ्टी सिस्टम जैसे त्वचा में रक्त प्रवाह कम करना, कंपकंपी और रोंगटे खड़े होना भी नाकाम पड़ सकती हैं.
95°F से नीचे तापमान जाने की स्थिति को हाइपोथर्मिया कहा जाता है, जो आम तौर पर खतरनाक मानी जाती है. हालांकि, मेडिकल साइंस में कुछ विशेष परिस्थितियों में कंट्रोल रूप से शरीर को ठंडा करना जान बचाने वाला भी साबित होता है.
हाइपोथर्मिया के खतरे
हल्का हाइपोथर्मिया (89.6–95°F) में भूख, मतली, भ्रम और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. मध्यम अवस्था (89.6°F से नीचे) में सुस्ती, धीमी सांस और हार्टबीट देखी जाती है. हाइपोथर्मिया (82.4°F से नीचे) में ब्लडप्रेशर और दिल की धड़कन खतरनाक रूप से गिर जाती है, और शरीर “शटडाउन” की ओर बढ़ता है.
खून जमाने वाली ठंड में जिंदा बचे लोग
1999 में स्वीडन की रेडियोलॉजिस्ट एना बोगेनहोम बर्फीले पानी में गिर गईं. उनका शरीर तापमान 56.7°F तक गिर गया, फिर भी लंबी प्रक्रिया के बाद वे पूरी तरह ठीक हो गईं. 2014 में पोलैंड के एक छोटे बच्चे आदाम का तापमान 53.2°F तक गिरा, फिर भी उपचार के बाद वह स्वस्थ हो गया. विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक ठंड में ब्रेन की ऑक्सीजन की जरूरत कम हो जाती है, जिससे कुछ मामलों में सेल्स डैमेज होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है.
हाइपोथर्मिया से उपचार का हिस्सा
दिल या ब्रेन सर्जरी में डॉक्टर कभी-कभी कंट्रोल्ड ठंडक का उपयोग करते हैं ताकि अंगों को क्षति से बचाया जा सके. 1961 में एक मरीज को 39.6°F तक ठंडा किया गया जिससे उसका ब्रेन डैमेज न हो. हालांकि, आधुनिक चिकित्सा अब न्यूनतम आवश्यक ठंडक पर जोर देती है, क्योंकि इससे संक्रमण, रक्त का थक्का न बनना और किडनी समस्याएं जैसे जोखिम जुड़े हैं.
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शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर Bharat.one Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
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