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Mental Health Crisis in India: युवाओं में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो डिजिटल डिवाइस का ज्यादा इस्तेमाल, करियर का दबाव और नौकरी की टेंशन युवाओं को मानसिक मरीज बना रही है. एक जमाने में बुजुर्गों को मेंटल डिजीज का खतरा ज्यादा था, लेकिन अब 18 से 30 साल के युवाओं को इसका रिस्क ज्यादा है.
Mental Health Problems in Youth: आजकल अधिकतर लोग अपनी फिटनेस को लेकर काफी जागरूक नजर आ रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग जिम में जाकर पसीना बहा रहे हैं, तो कई लोग पार्क में योगा और एक्सरसाइज कर रहे हैं. सेहत को दुरुस्त बनाए रखने के लिए यह जरूरी भी है. हालांकि इन दिनों अधिकतर लोग एक अनजान संकट से जूझ रहे हैं. यह संकट मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों का है. डॉक्टर्स की मानें तो फिजिकल हेल्थ पर लोगों का खूब ध्यान रहता है, लेकिन भारत में मेंटल हेल्थ को लेकर जागरुकता की कमी है. पढ़े लिखे लोग भी मेंटल प्रॉब्लम्स को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसकी वजह से ये परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो भारत इस वक्त मेंटल हेल्थ क्राइसिस से जूझ रहा है.
नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने Bharat.one को बताया कि मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं और इनका सबसे ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं. पढ़ाई और करियर का दबाव, नौकरी की चिंता और आर्थिक तंगी जैसे फैक्टर्स युवाओं की मेंटल हेल्थ बिगाड़ रहे हैं. आजकल अधिकांश मानसिक बीमारियों की शुरुआत 18 से 25 साल की उम्र के आसपास हो जाती है. इस स्टेज पर युवा मेंटल डिजीज के लक्षणों को स्ट्रेस या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे समस्या बढ़ती रहती है और कंडीशन गंभीर हो जाती है.
डॉक्टर ने बताया कि 18 से 35 साल की उम्र मेंटल डिजीज के लिए सबसे ज्यादा सेंसिटिव मानी जाती है. इसी उम्र में डिप्रेशन, एंजायटी, पैनिक डिसऑर्डर और सुसाइडल थॉट्स की शुरुआत सबसे ज्यादा देखी जा रही है. डिजिटल लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. लगातार तुलना, फेलियर का डर, ऑनलाइन ट्रोलिंग और नींद की कमी मानसिक संतुलन बिगाड़ रही है. कई युवा फंक्शनल डिप्रेशन से जूझ रहे हैं, जिसमें व्यक्ति बाहर से सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर मानसिक तनाव से टूट रहा होता है. ऐसे में करीबी लोगों को भी बीमारी का पता नहीं लग पाता है.
पिछले दिनों इंडियन साइकेट्री एसोसिएशन ने एनुअल कॉन्फ्रेंस में मेंटल हेल्थ को लेकर डाटा जारी किया था, जिसने सभी को हैरान कर दिया था. इसमें पता चला है कि भारत में मानसिक बीमारियों से जूझ रहे करीब 60 प्रतिशत मरीजों की उम्र 35 साल से कम है. यह ट्रेंड बताता है कि देश में मानसिक समस्याओं का बोझ सबसे तेजी से युवाओं और युवा वयस्कों पर बढ़ रहा है, जो भविष्य में एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चुनौती बन सकता है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि अब मेंटल हेल्थ को केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता के तौर पर देखने की जरूरत है. खासकर 35 साल से कम उम्र के लोगों के लिए स्कूल, कॉलेज और वर्कप्लेस पर काउंसलिंग सिस्टम, आसान इलाज और ओपन बातचीत का माहौल जरूरी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार “लोग क्या कहेंगे” का डर, परिवार का सपोर्ट न मिलना और मानसिक बीमारी को कमजोरी समझना युवाओं को चुप रहने पर मजबूर करता है, जिससे समस्या और गहराती चली जाती है. युवाओं को अब मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूक होने की जरूरत है, ताकि इन समस्याओं से बचा जा सके.
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अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-people-under-30-at-high-risk-of-mental-problems-in-india-expert-reveals-biggest-reason-prevention-tips-10131161.html
