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Sadaqa-e-Fitr in Ramadan: रमजान में सदका-ए-फित्र का महत्व: ईद से पहले अदा करना जरूरी.

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Sadaqa-e-Fitr in Ramadan: रमजान में सिर्फ इबादत और रोजे का ही नहीं बल्कि फितरे का भी विशेष महत्व बताया गया है. यह इस्लाम में दान-पुण्य के महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता हैं, जिनका पालन करना हर सक्षम मुसलमान पर फर्ज…और पढ़ें

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फितरा अदा करना हर मुसलमान पर है वाजिब

हाइलाइट्स

  • रमजान में सदका-ए-फितर का विशेष महत्व है.
  • प्रति व्यक्ति 90 रुपये या 2.45 किलो गेहूं देना चाहिए.
  • ईद की नमाज से पहले सदका-ए-फितर देना जरूरी है.

बाड़मेर. रमजान का पाक महीना मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद अहम होता है. यह महीना इबादत, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस दौरान दुनिया भर के मुसलमान रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं और अल्लाह की रहमत पाने के लिए दुआ मांगते हैं. इस्लाम धर्म में रमजान को नेकियों और पुण्य का महीना कहा जाता है, जिसमें किए गए हर अच्छे कार्य का कई गुना अधिक सवाब मिलता है.

रमजान में सिर्फ इबादत और रोजे का ही नहीं बल्कि फितरे का भी विशेष महत्व बताया गया है. यह इस्लाम में दान-पुण्य के महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता हैं, जिनका पालन करना हर सक्षम मुसलमान पर फर्ज होता है. माह-ए-रमजान में मुसलमानों के ऊपर सदका-ए-फितर वाजिब है. यह परिवार के सभी सदस्यों की तरफ से दिया जाता है. भारत में इसकी मिकदार 2 किलो 45 ग्राम गेहूं है या 90 रुपये जो हर मोमिन पर वाजिब है. सदका-ए-फित्र को रमजान के महीने की माफी भी कहा जाता है. रोजेदार अगर रोजे के दौरान कोई गलती भी कर बैठते हैं तो इसके जरिए वह अपनी गलती सुधार सकते हैं.

ईद से पहले अदा करना जरूरी
खुदा ने अपने बन्दों पर एक सदका मुकर्रर फरमाया है जिसे रमजान शरीफ के खत्म होने, खुशी और शुक्रिया के तौर पर अदा करना होता है. यह सदका-ए-फित्र कहलाता है. देशभर के रोजदार ईद की तैयारियों में जुटे हुए हैं, लेकिन ईद की नमाज से पहले अपना और अपने बच्चों का सदका-ए-फित्र गरीबों को देना न भूलें. क्योंकि ईद की नमाज से पहले सदका-ए-फित्र देना जरूरी होता है. इसके बाद ही नमाज अदा की जाती है.

जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना हाजी लाल मोहम्मद सिद्दीकी बताते हैं कि प्रति व्यक्ति 90 रुपये या 2 किलो 45 ग्राम गेहूं के हिसाब से सदका-ए- फित्र दिया जाना चाहिए. रमजान के आखिरी दिन का सूरज गुरुब होते ही सदका-ए-फितर वाजिब हो जाता है और इसे ईद की नमाज से पहले अदा करना जरूरी होता है. इसके बिना ईदगाह में नमाज कबूल नहीं होती है.

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रमजान में सदका-ए-फितर का क्या है महत्व? इसके बिना कबूल नहीं होती है ईद की नमाज

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