सर्दियों का मौसम खत्म होने से पहले छोटे पत्ते वाली सब्जियों को डाइट में शामिल करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इन्हीं में से एक है सोआ की सब्जी, जिसे अंग्रेजी में Dill कहा जाता है. यह हरी पत्तेदार सब्जी न सिर्फ स्वाद में अलग और खुशबूदार होती है, बल्कि इसके पोषण गुण भी इसे खास बनाते हैं. जब सोआ को आलू और सोया के साथ मिलाकर बनाया जाता है, तो यह एक ऐसी डिश बन जाती है जो स्वाद, पोषण और सादगी तीनों का बेहतरीन संतुलन पेश करती है. ठंड के मौसम में यह सब्जी शरीर को अंदर से गर्म रखने और ताकत देने का काम करती है.
हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सोआ की पत्तियां देखने में पतली और नाजुक होती हैं, लेकिन इनके फायदे काफी बड़े हैं. रिसर्च के अनुसार, सोआ में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को कम करने में मदद कर सकते हैं. यह विटामिन A और विटामिन C का अच्छा स्रोत है, जो इम्युनिटी बढ़ाने और त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक माने जाते हैं. इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी मिनरल्स भी मौजूद होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं. सर्दियों में जब शरीर को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है, तब सोआ की सब्जी एक बेहतरीन विकल्प बनती है.
सोआ को आयुर्वेद और पारंपरिक खानपान में पाचन के लिए भी फायदेमंद माना गया है. इसमें मौजूद नैचुरल कंपाउंड्स सूजन को कम करने में मदद करते हैं और पेट की परेशानियों जैसे गैस, अपच और पेट दर्द में राहत देते हैं. कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि सोआ पेट की जलन को शांत करने, अल्सर से बचाव और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो सकती है. यही वजह है कि इसे हल्की लेकिन असरदार सब्जी माना जाता है.
अगर बात करें आलू और सोया के साथ सोआ की सब्जी की, तो यह कॉम्बिनेशन इसे और ज्यादा पौष्टिक बना देता है. आलू शरीर को ऊर्जा देता है, वहीं सोया प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है. सोया मांसपेशियों को मजबूत करने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. जब इन दोनों को सोआ की खुशबूदार पत्तियों के साथ पकाया जाता है, तो सब्जी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब बनती है, बल्कि एक कंप्लीट मील जैसा अहसास देती है.
इस सब्जी को बनाना भी बेहद आसान और सिंपल है. हल्के मसालों में बनी सोआ, आलू और सोया की सब्जी रोटी, पराठे या बाजरे की रोटी के साथ खास तौर पर अच्छी लगती है. ज्यादा मसाले या भारी तड़के की जरूरत नहीं होती, क्योंकि सोआ की अपनी खुशबू और स्वाद ही इस डिश की पहचान होती है. यही वजह है कि इसे रोजमर्रा के खाने में भी आराम से शामिल किया जा सकता है.
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