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नए साल की पहली ट्रिप बन जाएगी यादगार, अजंता-एलोरा जैसी इन सीक्रेट डेस्टिनेशन का करें प्लान

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New year plan 2026 :अगर आप भी नए साल 2026 पर अजंता एलोरा की गुफाएं देखने जाने का प्लान बना रहे हैं तो कैंसल कर दीजिए, क्योंकि इसके लिए आपको महाराष्ट्र जाने की जरूरत नहीं है, मध्य प्रदेश के धार में ही ऐसी गुफाएं मौजूद है. यहां आकर आपको लगेगा आप अजंता एलोरा पहुंच गए है. यह गुफाएं भी बौद्ध कालीन होकर उतनी ही पुरानी है. 

नए साल पर हजारों लोग महाराष्ट्र की प्रसिद्ध अजंता-एलोरा गुफाओं को देखने निकल पड़ते हैं. ऐतिहासिक गुफाएं, प्राचीन चित्रकारी और बौद्ध विरासत हर किसी को आकर्षित करती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी तर्ज पर बनी बौद्ध कालीन गुफाएं मध्य प्रदेश में भी मौजूद हैं, जो कम भीड़ और ज्यादा सुकून का अनुभव देती हैं.

हम बात कर रहे हैं धार जिले की प्रसिद्ध बाघ गुफाओं की. ये गुफाएं 5वीं से 7वीं शताब्दी के बीच निर्मित मानी जाती हैं और बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई हैं. विंध्य पर्वत की दक्षिणी ढलान पर बाघिनी नदी के किनारे स्थित ये गुफाएं नए साल की यात्रा के लिए एकदम परफेक्ट डेस्टिनेशन हैं.

भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी बौद्ध और हिंदू धर्म से जुड़ी गुफाएं मौजूद हैं. प्राचीन समय में ऋषि-मुनि और बौद्ध भिक्षु इन गुफाओं में ध्यान, तप और साधना किया करते थे. बाघ गुफाएं भी इसी परंपरा की एक जीवंत मिसाल हैं.

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बाघ गुफाओं का निर्माण अजंता-एलोरा की शैली में किया गया है. यहां चैतन्य हॉल, स्तूप, विहार और भिक्षुओं के रहने की कोठरियां बनी हुई हैं. गुफाओं की दीवारों पर बनी भित्ति चित्रकारी आज भी लोगों को हैरान कर देती है और कला प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है.

इतिहासकारों के अनुसार इन गुफाओं की खोज 1818 में डेंजर फील्ड ने की थी. माना जाता है कि बौद्ध धर्म के पतन के बाद ये गुफाएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं और यहां बाघों का बसेरा हो गया, इसी वजह से इनका नाम बाघ गुफाएं पड़ा. गांव और नदी का नाम भी इसी से जुड़ गया.

यहां कुल 9 गुफाएं हैं, जिनमें से कुछ नष्टप्राय हैं. गुफा नंबर 2 को पांडव गुफा, तीसरी को हाथीखाना और चौथी को रंगमहल कहा जाता है. इन गुफाओं की वास्तुकला और चट्टानों को काटकर की गई संरचना पूरे भारत में अपनी अलग पहचान रखती है.

इतिहास में भी बाघ गुफाओं का उल्लेख मिलता है. 416-17 ईस्वी के एक ताम्रपत्र में इस बौद्ध विहार को दान दिए जाने का जिक्र है, जिसे कल्याण विहार कहा गया है. नए साल पर परिवार या दोस्तों के साथ छोटी ट्रिप के लिए यह जगह काफी पसंद की जा रही है.

बाघ गुफाएं इंदौर से करीब 60 किलोमीटर, धार जिला मुख्यालय से लगभग 97 किलोमीटर ओर खरगोन से करीब 125 किलोमीटर दूर स्थित हैं. निमाड़-मालवा क्षेत्र में स्थित इन गुफाओ तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते है. तो नए साल पर किसी नई जगह जाना चाहते है तो अजंता-एलोरा की जगह MP की बाघ गुफाएं जरूर अपनी लिस्ट में शामिल करें.

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नए साल की पहली ट्रिप बनेगी यादगार,प्लान करें अजंता-एलोरा जैसी ये सीक्रेट प्लेस


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