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लातेहार स्थित लोध फॉल, जो 143 मीटर की ऊंचाई के साथ झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है. नए साल पर पर्यटकों का हॉटस्पॉट बना रहा। बूढ़ा नदी का गिरता पानी और प्राकृतिक हरियाली सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर रही है. वन विभाग जल्द ही क्षतिग्रस्त लकड़ी के पुल की मरम्मत कराएगा.
लातेहारः झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल नववर्ष के पहले दिन पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया. नए साल के जश्न के मौके पर हजारों की संख्या में सैलानी यहां पहुंचे और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ झारखंड के सबसे ऊंचे जलप्रपात का आनंद उठाया. बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.
143 मीटर की ऊंचाई से गिरता पानी बना आकर्षण
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में स्थित लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है. करीब 143 मीटर की ऊंचाई से बूढ़ा नदी का पानी जब सीधे धरती पर गिरता है, तो उसका दृश्य बेहद रोमांचकारी और मनमोहक प्रतीत होता है. चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ियों से घिरा यह क्षेत्र पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले आता है.
दूरी के बावजूद उमड़ रही भारी भीड़
लोध फॉल लातेहार जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर और रांची से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इसके बावजूद नववर्ष के मौके पर यहां पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली. यहां पहुंचे सैलानी प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आए और दिनभर फोटो व वीडियो बनाते दिखे.
पर्यटकों ने की व्यवस्थाओं की सराहना
यहां पहुंचे पर्यटक उदित ने बताया कि लोध फॉल की खूबसूरती मन को सुकून देती है. उन्होंने कहा कि तीन अलग-अलग दिशाओं से पहाड़ी से गिरता पानी इस जलप्रपात को और खास बनाता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि जलप्रपात के पास बना लकड़ी का पुल दुरुस्त रहता, तो पर्यटकों को और बेहतर अनुभव मिलता.
लकड़ी का पुल क्षतिग्रस्त, जल्द होगा मरम्मत
लोध जलप्रपात को आकर्षक बनाने के लिए वन विभाग द्वारा यहां लकड़ी का पुल बनाया गया था, जो पिछले वर्ष भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया. सुरक्षा कारणों से फिलहाल पर्यटकों को पुल पर जाने से रोक दिया गया है. वन विभाग ने पुल की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है और जल्द इसे दुरुस्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
दूसरे राज्यों और विदेशों से भी आते हैं सैलानी
लोध फॉल झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय है. नवंबर से मार्च तक यहां पर्यटकों का आना लगातार बना रहता है. खास बात यह है कि यहां विदेशी पर्यटक भी पहुंचते हैं. सुरक्षा को लेकर वन विभाग की ओर से विकास समिति के माध्यम से विशेष व्यवस्था की जाती है. गहरे पानी वाले क्षेत्र में उतरने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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