जब भी कोई फैसले की घड़ी हो तो हमेशा हमारे सामने दो रास्ते निकलकर आते हैं. पहला रास्ता जो दिमाग सोचता है, और दूसरा जो दिल से सही लगता है. ऐसे में कंफ्यूजन बढ़ जाता है कि किस फैसले के साथ आगे बढ़े. जबकि सद्गुरु बताते हैं कि दिल को सिर्फ खून पंप करने का ही काम करने देना चाहिए. फैसले सभी आपके दिमाग की उपज होती है, इसलिए जब भी कुछ डिसिजन लेना हो तो दिमाग को स्थिर रखकर सोच-समझना और फिर आगे बढ़ना जरूरी है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homevideos
दिल या दिमाग किसकी सुनें? सद्गुरु ने दिया ये जवाब
