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‘अब मारो…’ मास्‍साब की कुटाई से बचने का बच्‍चों ने न‍िकाला अनोखा जुगाड़, सुनते ही हंसने लगे प्रेमानंद बाबा

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बच्‍चों को पढ़ाने वाले इस टीचर ने प्रेमानंद बाबा के सामने जैसे ही अपनी दुव‍िधा रखी, वह सुनते ही जोर-जोर से हंसने लगे. प्रेमानंद महाराज का ये वीड‍ियो जमकर वायरल हो रहा है.

'अब मारो...' मास्‍साब की कुटाई से बचने का बच्‍चों ने न‍िकाला अनोखा जुगाड़

बच्‍चों को पढ़ाने वाले इस टीचर ने प्रेमानंद बाबा के सामने अपनी दुव‍िधा रखी

हाइलाइट्स

  • बच्चों ने शैतानी के दौरान ‘श्री हरिवंश’ और ‘राधा’ नाम जपना शुरू किया.
  • प्रेमानंद महाराज ने बच्चों के नाम जप को सही ठहराया.
  • महाराज ने कहा, नाम जप से बच्चों का उद्धार होगा.

वृंदावन के सुप्रस‍िद्ध संत, प्रेमानंद महाराज के प्रवचन और उनकी बातें धीरे-धीरे देश और पूरी दुनिया में फैलने लगी हैं. प्रेमानंद महाराज ‘नाम जप’ के प्रताप के बारे में लोगों को बताते हैं और कई लोगों का जीवन भगवत मार्ग पर ले गए हैं. लेकिन हाल ही में उनसे म‍िलने एक ऐसा टीचर पहुंचा, ज‍िसके ल‍िए प्रेमानंद महाराज के यह प्रवचन ही परेशानी का सबब बन गए हैं. बच्‍चों को पढ़ाने वाले इस टीचर ने प्रेमानंद बाबा के सामने जैसे ही अपनी दुव‍िधा रखी, वह सुनते ही जोर-जोर से हंसने लगे. चल‍िए आपको बताते हैं, क्‍या है ये पूरा माजरा.

हाल ही में प्रेमानंद महाराज के साथ होने वाले एकांत‍िक वार्तालाप में एक टीचर पहुंचा. इस टीचर ने अपना सवाल रखा, ‘महाराज जी मैं एक श‍िक्षक हूं और जब भी व‍िद्यार्थी उद्दंडता (शैतानी) करते हैं और मैं उन्‍हें डांटता हूं, या दंड देने की कोशिश करता हूं, तो बच्‍चे जोर-जोर से ‘श्री हरिवंश-श्री हरिवंश’ या ‘राधा-राधा’ नाम च‍िल्‍लाने लगते हैं. कहते हैं, ‘अब मारो…’ अब इस स्‍थ‍ित‍ि में मैं क्‍या करूं?’ ये सुनते ही प्रेमानंद महाराज ठहाका लगाकर हंस पड़े.

प्रेमानंद बाबा ने कहा, ‘ये तो बहुत ही बढ़‍िया तरीका न‍िकाला है बच्‍चों ने.’ वह आगे कहते हैं, ‘नहीं आपको उन्‍हें नहीं मारना चाहिए, अपराध लगेगा. आप च‍िंता मत करो, श्री हरिवंश नाम सुधारेगा, राधा नाम सुधारेगा उन्‍हें. जो बच्‍चे हरिवंश का आश्रय ल‍िए हैं, उनकी मुक्‍ति शुद्ध हो जाएगी. क्‍योंकि उन्‍होंने भय से ही सही, लेकिन नाम जप ये नहीं देखता, नाम उच्‍चारण मात्र से परमपव‍ित्र कर देता है.’ वह आगे कहते हैं कि जो बच्‍चे बचपन से ही नाम आश्र‍ित हैं, उनके कभी बुरे कर्म बनेंगे ही नहीं. क्‍योंकि उनमें ये भाव है कि ये नाम मुझे संकट से बचा लेगा, तो ये नाम पाप कर्मों से भी बचा लेगा, संसार से भी बचा लेगा. नाम समर्थ है और बच्‍चे असमर्थ हैं, तो उन्‍होंने नाम का बल ल‍िया.’



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