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आखिर किस तिथि पर करना चाहिए माता और पिता का श्राद्ध? हरिद्वार के ज्योतिष से जानें  

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ओम प्रयास/हरिद्वार: सनातन धर्म में पितृपक्ष में तर्पण, पिंडदान करना बेहद ही जरूरी और महत्वपूर्ण होता है. पितृ पक्षों में अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करना जरूरी बताया गया है. श्राद्ध पक्ष की नवमी और अष्टमी तिथि बेहद खास बताई गई हैं. धार्मिक ग्रंथ ‘गरुड़ पुराण’ के अनुसार माता और पिता के श्राद्ध कर्म की एक निश्चित तिथि बताई गई है. आइए जानते हैं इस बारे में.

श्राद्ध 2024 से जुड़ी जानकारी
माता और पिता का श्राद्ध कौन सी तिथि में करें कि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो इसकी जानकारी लेने के लिए हमने हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री से सवाल किया. उन्होंने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक माता और पिता का श्राद्ध करने के लिए एक निश्चित तिथि होती है. यदि किसी जातक की माता ने अपना पंच भौतिक शरीर पिता से पहले किसी भी तिथि में त्याग किया है तो उनका श्राद्ध कर्म, तर्पण, पिंडदान, कर्मकांड पितृ पक्ष की नवमी तिथि को ही किया जाता है.

 नवमी तिथि पर किसका श्राद्ध होता है?
यदि उनका श्राद्ध उस तिथि में किया गया है, जिस तिथि में उन्होंने अपना शरीर त्याग किया है तो ऐसी स्थिति में वह प्रेत योनि में भटकती रहती हैं और उन्हें शांति नहीं मिलती है.’गरुड़ पुराण’ के अनुसार उन्हें शांति प्रदान करने के लिए उनका श्राद्ध आश्विन माह कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) की नवमी तिथि को ही किया जाना जरूरी होता है.

कब करना चाहिए पिता का श्राद्ध?
पिता का श्राद्ध करने के लिए भी ‘गरुड़ पुराण’ में एक निश्चित तिथि बताई गई है. पिता का श्राद्ध तर्पण करने के लिए पितृ पक्ष की अष्टमी होती है. पिता का श्राद्ध केवल अष्टमी तिथि को ही किया जाता है. पिता का श्राद्ध कर्म, तर्पण, पिंडदान, कर्मकांड पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि को करने से उन्हें शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसा भी कहा जाता है कि माता और पिता का तर्पण, पिंडदान, कर्मकांड, श्राद्ध कर्म आदि नवमी और अष्टमी तिथि पर करने से ओर कुछ शेष नहीं रह जाता है. जातक पितृ ऋण से मुक्त हो जाता है और माता पिता को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

Note: माता और पिता के श्राद्ध कर्म की ओर अधिक जानकारी करने के लिए आप हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री से उनके फोन नंबर 9557125411 और 9997509443 पर संपर्क कर सकते हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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