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कुंवारों के लिए खास है ये परंपरा, निभाते ही हो जाएगी शादी, जानें बैद्यनाथधाम का ये अद्भुत रहस्य

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Agency:Bharat.one Jharkhand

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Deoghar News: बैद्यनाथधाम, 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र ऐसा स्थान है जहां भगवान शिव और माता शक्ति के मिलन के लिए यह परंपरा निभाई जाती है. यह परंपरा महाशिवरात्रि के समय विशेष रूप से होती है, जिससे भक्तों को शिव…और पढ़ें

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गठबंधन की महत्व के बारे में बताते देवघर बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित.

हाइलाइट्स

  • बैद्यनाथधाम में शिव-शक्ति का विशेष वास है।
  • महाशिवरात्रि पर गठबंधन की परंपरा निभाई जाती है।
  • गठबंधन से विवाह और संतान की समस्याएं दूर होती हैं।

देवघर. 12 ज्योतिर्लिंग में से एक देवघर के बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग भी शामिल है. इस ज्योतिर्लिंग में कई ऐसी अनोखी परंपरा है, जो शायद ही आपको किसी अन्य ज्योतिर्लिंग में देखने को मिलेगी. इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का महत्व और भी खास हो जाता है. माना जाता है कि ज्योतिर्लिंग से पहले यह शक्तिपीठ है, क्योंकि इस ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव से पहले शक्ति का स्थान है. देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में शिव से पहले शक्ति की आराधना की जाती है. इसलिए यहां भक्तो के द्वारा की गयी पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

इस ज्योतिर्लिंग में शिव से पहले शक्ति का है वास
देवघर बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने Bharat.one के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में माता शक्ति का विशेष वास है. ऐसा किसी ज्योतिर्लिंग में ऐसा उल्लेख नहीं है. इस ज्योतिर्लिंग में शिव और शक्ति का एक साथ वास रहने के कारण इस ज्योतिर्लिंग का महत्व बेहद खास है. पुराण के अनुसार सतयुग की घटना में जब राजा दक्ष की पुत्री सती ने अग्नि मे प्रवेश की तो उनका शरीर का अंग कई जगहों पर गिरा. वहीं देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में माता सती का ह्रदयगिरा था., जिस वजह से यह ह्रदयपीठ भी कहलाता है. यानी यहां भगवान शिव के आने से पहले माता शक्ति आयीं थी.

इस ज्योतिर्लिंग में है गठजोड़ की परम्परा
बैद्यनाथमंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने जानकारी देते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव और माता शक्ति का वास है. इसलिए यहां पर अकेले भगवान शिव की पूजा करना अधूरी मानी जाती है. इसलिए इस ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव और माता शक्ति के मिलन के लिए गठजोड़ की परंपरा है. यह गठजोड़ आपको किसी भी ज्योतिर्लिंग में देखने को नहीं मिलेगी. यह गठबंधन लाल धागे का होता है, जो भगवान शिव मंदिर के शिखर से लेकर माता पार्वती मंदिर के शिखर तक जोड़ा जाता है. यहां पर गठबंधन करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं जरूर पूर्ण होती हैं.

कौन-कौन कर सकते हैं गठबंधन?
देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में वैसे तो सभी भक्त गठबंधन कर सकते हैं, लेकिन विशेष कर जिनकी शादी विवाह में समस्या उत्पन्न हो रही है या फिर संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है. साथ ही पारिवारिक जीवन में कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही हैं. वैसे लोग गठबंधन करने से इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. बैद्यनाथ मंदिर में पूजा आराधना करने आए भक्त को गठबंधन अवश्य करना चाहिए. इससे भगवान शिव और माता शक्ति दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

महाशिवरात्रि में खुलता है गठबंधन
देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती दोनों मंदिर के शिखर पर गठबंधन की परंपरा है. यह गठबंधन साल में एक ही बार सिर्फ महाशिवरात्रि से 2 दिन पहले उतारी जाती है और सरदार पंडा के द्वारा पूजा आराधना कर फिर से महाशिवरात्रि से दिन पहले गठबंधन की जाती है.

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कुंवारों के लिए खास है ये परंपरा, निभाते ही हो जाएगी शादी, जानें रहस्य

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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