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क्या श्मशान से आती है महाकाल को चढ़ाने वाली भस्म? दर्शन मात्र से मिलती है हर कष्ट से मुक्ति, जानें किस प्रकार चढ़ाते हैं ये भस्म?

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हाइलाइट्स

महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त शिवलिंग की विधि विधान से पूजा करते हैं. वहीं भारत के अलग अलग राज्यों में मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए भी पहुंचते हैं.

Mahakal Bhasma Arti : महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त शिवलिंग की विधि विधान से पूजा करते हैं. वहीं भारत के अलग अलग राज्यों में मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए भी पहुंचते हैं, जहां से कई सारी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इनमें से एक हैं मप्र के उज्जैन में स्थित महाकाल. इस ज्योतिर्लिंग को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से व्यक्ति को भय से मुक्ति मिल जाती है. इसके अलावा महाकाल बाबा की भस्म आरती की जाती है, जिसको लेकर कहा जाता है कि यह भस्म श्मशान से आती है. लेकिन क्या यह सच है? आइए जानते हैं इस विषय में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

क्या श्मशान से आती है भस्म?
बाबा महाकाल पर चढ़ने वाली भस्म को श्मसान से नहीं लाया जाता. बल्कि इसे मंदिर के प्रांगण में श्री महंत के मार्गदर्शन में अखंड धुनि में बनाया जाता है.

इन चीजों से मिलकर बनती है भस्म
महाकाल पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलताश और बेर के वृक्ष की लकड़ियों को एक साथ जलाया जाता है. इस दौरान उचित मंत्रोच्चारण किए जाते हैं.

इस प्रकार चढ़ाई जाती है भस्म
बताई गई सभी चीजों को अखंड धुनि में जलाने पर जो भस्म प्राप्त होती है उसे कपड़े से छाना जाता है. इस प्रकार तैयार की गई भस्म को महाकाल को अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि, महाकाल पर चढ़ने के बाद इस भस्म को प्रसाद के रूप में मिलने पर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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