ऋषिकेश: वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी विवाह मनाया जाता है. यानि यह पर्व देवउठनी एकादशी तिथि के टीक अगले दिन मनाया जाता है. हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु एवं तुलसी माता की शादी हुई थी. इस शुभ अवसर पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है. इस वर्ष तुलसी विवाह 13 नवंबर को मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी विवाह के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय आपकी कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं.
Bharat.one के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित श्री सच्चा अखिलेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि तुलसी विवाह का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है. कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को यह पवित्र पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह होता है, जिससे दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है. तुलसी विवाह करने से जीवन में शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में खुशियां आती हैं, और पवित्रता का अनुभव होता है. तुलसी विवाह को देवउठनी एकादशी के बाद के शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है.
तुलसी विवाह के दिन करें ये विशेष उपाय
⦁ यदि आपके दांपत्य जीवन में समस्याएं आ रही हैं या प्रेम संबंध में मुश्किलें हैं, तो तुलसी विवाह के दिन अपने साथी के साथ मंगलाष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है. इससे संबंध में सकारात्मकता और मधुरता आती है.
⦁ इसके अलावा, घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए इस दिन मां तुलसी के सामने घी का दीया जलाना चाहिए. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है.
⦁ वहीं अगर आप अखंड सौभाग्य की कामना करते हैं या संतान प्राप्ति का संकल्प रखते हैं, तो तुलसी विवाह के दिन भगवान शालिग्राम और मां तुलसी का विवाह करें. इस विवाह को विधि अनुसार संपन्न करना चाहिए. साथ ही, सोलह शृंगार का सामान देवी तुलसी को अर्पित करना चाहिए. जिससे देवी का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
FIRST PUBLISHED : November 6, 2024, 20:05 IST
