Home Uncategorized chhath puja 2024 Do not offer the same Prasad twice during Chhath...

chhath puja 2024 Do not offer the same Prasad twice during Chhath Puja changed Prasad both times

0
8


भागलपुर. लोक आस्था का महापर्व छठ अपने आप में अनूठा है. इस पर्व का लोगपूरे साल बेसब्री से इंतजार करते हैं. छठ पूजा के दौरान हर विधि-विधान पर बारीकि से नजर रखना पड़ता है. इसमें उपयोग होने वाले सभी सामाग्री बेहद खास है और सभी का अपना विशेष महत्व है. इस पर्व में अधिकांश ऋतु फल को चढ़ाया जाता है. सबसे खास बात यह है कि सूप में सभी को डालकर अर्घ्य दिया जाता है. इसमें सबसे अधिक प्रसाद का महत्व होता है.

छठ पर्व में दो दिन अर्घ्य दिया जाता है. इसमें अस्ताचलगामी और उदयीमान सूर्य के दोनों रूप को अर्घ्य दिया जाता है. वहीं दोनों दिन प्रसाद भी चढ़ाया जाता है. कई जगहों पर एक बार जो प्रसाद चढ़ता है, उसी का भोग लगाया जाता है. वहीं कई जगहों पर दोनों समय प्रसाद बदला जाता है. व्रतियों को कोई शंका ना रहे रहे इस पर भागलपुर के विद्वान पंडित से जानेंगे कि प्रसाद चढ़ाने का सही तरीका क्या है.

दोनों समय बदल देना चाहिए प्रसाद

भागलपुर के विद्वान पंडित अमोद मिश्रा ने Bharat.one को बताया कि छठ पर्व के दाैरान कई जगहों पर दोनों समय प्रसाद चढ़ाया जाता है, तो कई जगहों पर एक ही दिन प्रसाद चढ़ाया जाता है. लेकिन, सही नियम यह है कि दोनों समय प्रसाद को बदलें, क्योकि जिस प्रसाद का आप एक बार भोग लगा देते हैं, उस प्रसाद का भोग दोबारा नहीं लगना चाहिए. इसलिए, दोनों समय प्रसाद को बदलना चाहिए. जब आप पूजा करते हैं तो एक बार भोग लगाने के बाद दूसरे बार नहीं लगाते हैं. ठीक उसी प्रकार एक ही प्रसाद पर अर्घ्य नहीं देना चाहिए. दोनों समय प्रसाद को बदलना ही सही तरीका है.

36 घंट तक व्रती रहती हैं निर्जला

आपको बता दें कि 36 घंटे तक यह व्रत निर्जला रखा जाता है. व्रती सुबह के अर्घ्य के बाद ही डलिया के प्रसाद से अपना व्रत तोड़ती है. उसके बाद जल ग्रहण करती है. यह काफी कठिन व्रत होता है. यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है. छठी मईया भगवान सूर्य की बहन है. इसलिए, इसमें भगवान भास्कर यानी सूर्य भगवान की उपासना की जाती है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version