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दिल्ली के इस मंदिर में शीला दीक्षित के CM बनने की मनोकामना हुई थी पूरी, यहां बिल्ली भी करती है पूजा, वीडियो देखकर दंग हो जाएंगे आप

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दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मुख्यमंत्री बनने की मनोकामना किस मंदिर से पूरी हुई थी. अगर नहीं, तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं दिल्ली के एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में. जहां पर शीला दीक्षित ने मुख्यमंत्री बनने की मनोकामना मांगी थी और 3 दिनों तक इस मंदिर में सफाई का काम किया था. इसके बाद वह लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी.

इस दिन मंदिर में लगती है भीड़

यही नहीं यह मंदिर इतना चमत्कारी है कि यहां पर रोज एक बिल्ली भी आकर पूजा करती है. सिर झुकाती है और घंटों बैठी रहती है. उसे देखकर मंदिर प्रशासन भी हैरान है. इस मंदिर का नाम श्री दादा देव मंदिर है. यह मंदिर द्वारका सेक्टर-8 के दूसरी तरफ पालम में स्थित है. इस मंदिर की मान्यता इतनी है कि यहां पर सभी धर्म और जाति के लोग आते हैं. रविवार को यहां 10000 से ज्यादा लोग दर्शन करने आते हैं.

इल मंदिर की खास बात यह है कि यहां कोई महंत नहीं होता है. बल्कि यहां मंदिर में प्रधान होते हैं. वहीं, मंदिर की कमान को संभालते हैं. यहां पर सिर्फ पुजारी होते हैं, जो पूजा पाठ कराते हैं. साथ ही मनोकामना पूरी होने पर यहां लोग गुड चढ़ाते हैं.

जानें मंदिर का इतिहास

मंदिर कमेटी के प्रधान रह चुके भूप सिंह ने बताया कि दिल्ली के द्वारका उप-शहर में बसे प्राचीन बारह गांवों श्री दादा देव जी महाराज को अपने ग्राम देवता के रूप में पूजा करते हैं. इन बारह गांवों के नाम पालम, शाहबाद, बागडोला, नासिरपुर, बिंदापुर, डाबड़ी, असालतपुर, उंटाला, मटियाला, बापरोला, पूंठकला और नांगलराई है. यह मंदिर द10 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है.

उन्होंने बताया कि 800 संवत् यानि करीब 1200 साल पहले इस मंदिर का निर्माण हुआ था. टोंक जिला के रायसिंह से सोलंकियों की निकासी मानी जाती है. किसी कारणवश सोलंकी वंश के लोगों को टोंक जिले को छोडना पड़ा था. उन्होंने बताया कि दादा देव को भगवान विष्णु का ही अवतार लोग मानते हैं.

जानें कैसे हुई मंदिर की स्थापना

उन्होंने जिस शीला पर अपना ध्यान लगाया, जिस शिला पर बैठकर वह लोगों को सही का रास्ता दिखाते थे और जिस शिला पर उन्होंने अपने प्राण को त्यागा. उस शिला को लेकर उनके सेवक कर्मचंद्र दिल्ली लेकर आ गया था. जब वह दिल्ली लेकर आ रहा था उसी वक्त आकाशवाणी हुई थी कि जहां पर भी वह शिला गिर जाएगा या रखा जाएगा. उसी जगह पर दादा देव का मंदिर बनेगा. कहते हैं कि कर्मचंद्र के हाथ से शिला जहां गिरी, वहीं पर आज मंदिर की स्थापना हुई है.

शुभ काम की यहीं से होती है शुरुआत

दिल्ली में अगर कोई बाहर से आता है या यहीं के लोकल लोग अपने हर एक शुभ काम की शुरुआत इसी मंदिर से करते हैं. कहते हैं कि दिल्ली में रहने वाला हर एक शख्स यहां एक बार दर्शन करने जरूर आता है.  क्योंकि लोग इनको दिल्ली का ईष्ट देवता मानते हैं.

जानें कैसे पहुंचे मंदिर 

अगर आप भी इस मंदिर में जाना चाहते हैं, तो दर्शन पूजन करने के लिए तो इस मंदिर के पुजारी राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर द्वारका सेक्टर-8 के दूसरी तरफ पालम में स्थित है. यह बहुत ही मशहूर मंदिर है. यहां हर कोई इसे जानता है. गूगल पर इसका मैप भी पड़ा हुआ है. यह मंदिर सातों दिन खुलता है. सुबह 5:00 से लेकर रात 8:00 बजे तक के मंदिर खुला रहता है. यहां राम दरबार, शिवलिंग, बजरंगबली, राधा कृष्ण, मां जगदंबा समेत नवग्रह की पूजा भी होती है.

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