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न फूल न अगरबत्ती, गोंडा के इस मंदिर में क्यों चढ़ाया जाता है दारू-अंडा? हिंदू-मुस्लिम सभी लगाते हैं हाजिरी

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Gonda Tharu Baba Temple : गोंडा का ये मंदिर थारू बाबा नाम से चर्चित है. यहां गोंडा के अलावा बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिसे से भी श्रद्धालु आते हैं. सोमवार और शुक्रवार को इस जगह पर विशेष भीड़ लगती है. थारू बाबा के प्रति हिंदुओं के अलावा मुस्लिम धर्म के लोगों में भी गहरी आस्था है. वे यहां अपनी मुराद लेकर पीढ़ियों से आते रहे हैं. Bharat.one ने मंदिर के पुजारी से बात की.

(Tharu Baba Temple Gonda) गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड रुपईडीहा का ये मंदिर अनोखा है. ग्राम सभा लालनगर कहला में पड़ने वाले इस मंदिर के बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं. इसका नाम थारू बाबा मंदिर है. यहां पूजा-पाठ का तरीका बाकी मंदिरों से बिल्कुल अलग है. इस मंदिर में भगवान को प्रसाद के रूप में शराब (दारू) और अंडा चढ़ाया जाता है. Bharat.one से बातचीत में मंदिर के पुजारी विनय कुमार मिश्रा बताते हैं कि थारू बाबा एक सिद्ध पुरुष थे. कहा जाता है कि वे जंगलों में रहते थे और तंत्र-साधना करते थे. उनकी जीवनशैली आम संतों से अलग थी. मान्यता है कि थारू बाबा शराब और अंडा ग्रहण करते थे, इसलिए आज भी भक्त उनकी पसंद की चीजें ही प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं. दारू और अंडा के अलावा यहां मिठाई और फल बतौर प्रसाद चढ़ाया जाता है.

क्यों बनाई गई दो पिंडी

पुजारी विनय कुमार मिश्रा बताते हैं कि ग्रामीणों की ओर से एक नई पिंडी का निर्माण किया गया है क्योंकि इस स्थान पर रामायण पाठ, सत्यनारायण का कथा भी होता था. ग्रामीणों ने सोचा कि एक पिंडी बाहर बनवा दिया जाए तो दारू और अंडा वहीं चढ़ाया जाए. तब से आज तक यही होता आ रहा है.

क्यों चढ़ता है दारू और अंडा

विनय कुमार मिश्रा बताते हैं कि किसी को यह नहीं पता है कि दारू और अंडा क्यों चढ़ाया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. हमारे पूर्वज भी बताते थे कि यहां पर प्रसाद के रूप में अंडा और दारू चढ़ाया जाता है. लोग मानते हैं कि अगर मनोकामना पूरी हो जाएगी तो हम अंडा और दारू चढ़ाएंगे. पूरी हो जाने के बाद लोग आकर अंडा और दारू चढ़ाते हैं. ग्रामीण रामदयाल वर्मा बताते हैं कि किसी को ये नहीं पता है कि कितनी पुरानी पिंडी है, लेकिन लगभग 300 से 400 वर्ष पुरानी मानी जाती है.

क्या हिंदू, क्या मुस्लिम

ग्रामीण प्रभाकर मिश्र के अनुसार, हमारे पूर्वज इस मंदिर के बारे में कहानी किस्सा सुनाया करते थे कि गांव के बाहर एक स्थान है, जिसे थारू बाबा के नाम से जानते हैं, लेकिन किसी को यह नहीं पता है कि यह परंपरा कितनी पुरानी है और कब से चलती आ रही है. थारू बाबा के स्थान पर गोंडा के अलावा बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती से श्रद्धालु आते हैं. सोमवार और शुक्रवार को विशेष भीड़ होती है. मुस्लिम धर्म के लोग भी आते हैं.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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