आज की महिलाएं बहुत व्यस्त जीवन जीती हैं. वे नौकरी संभालती हैं, परिवार की देखभाल करती हैं और अपने सपनों को भी पूरा करने की कोशिश करती हैं. लेकिन इन सबके बीच अक्सर वे अपनी सेहत की नियमित जांच को नजरअंदाज कर देती हैं.
ऐसे में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सीनियर डायरेक्टर एंड हेड डॉक्टर अनिता के शर्मा का कहना है कि साल में एक बार हेल्थ चेक-अप कराना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने का एक जरूरी तरीका है. आजकल 20, 30 और 40 की उम्र की महिलाओं में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, इसलिए नियमित जांच और भी जरूरी हो गई है. इसे समय पर बीमारी का इलाज शुरु करके इसे गंभीर होने से रोका जा सकता है.
CBC
कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) शरीर की कुल सेहत की जानकारी देता है. इससे एनीमिया (खून की कमी), इंफेक्शन और इम्यून सिस्टम की समस्याओं का पता चलता है. इसके साथ साल में एक बार ब्लड शुगर, लिवर, किडनी और कोलेस्ट्रॉल की जांच भी करानी चाहिए. ये जांच डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और अंगों से जुड़ी शुरुआती दिक्कतों को पहचानने में मदद करती हैं.
थायरॉयड जांच
थायरॉयड की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है. ऐसे में TSH और कभी-कभी T3 व T4 की ब्लड जांच से थायरॉयड की समस्या जल्दी पकड़ में आ जाती है. समय पर पहचान होने से बांझपन, पीरियड्स की अनियमितता और दिल की दिक्कतों से बचा जा सकता है.
सर्वाइकल कैंसर की जांच
सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे समय पर जांच से रोका जा सकता है, फिर भी स्क्रीनिंग न कराने के कारण कई महिलाओं की जान चली जाती है. डॉक्टर 21 साल की उम्र के बाद हर साल पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं.
ब्रेस्ट की जांच
महिलाओं को हर महीने खुद से ब्रेस्ट की जांच करनी चाहिए और साल में एक बार डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए. 40 साल से ऊपर की महिलाओं या जिनके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो, उन्हें हर साल मैमोग्राफी करानी चाहिए. ब्रेस्ट कैंसर अगर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है.
विटामिन डी
आजकल कई युवा महिलाओं में विटामिन डी की कमी पाई जाती है, क्योंकि वे धूप में कम जाती हैं और ज़्यादातर समय घर या ऑफिस में रहती हैं. साल में एक बार विटामिन डी और कैल्शियम की जांच, और 40 साल के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट कराने से हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचाव किया जा सकता है.
प्रजनन और हार्मोन से जुड़ी जांच
जिन महिलाओं को पीरियड्स आते हैं, उन्हें साल में एक बार गायनेकोलॉजिस्ट से जांच जरूर करानी चाहिए. इसमें अल्ट्रासाउंड, हार्मोन जांच और PCOS, फाइब्रॉयड या एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याओं की स्क्रीनिंग शामिल हो सकती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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