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Basant Panchami Pooja Vidhi: बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा आराधना विद्यार्थियों को खासतौर पर करनी चाहिए. देवघर के ज्योतिषाचार्य बता रहे हैं कि कैसे पूजा करें ताकि पूरा फल मिले. ज्ञान पाने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति को इसी तरह पूजा करनी चाहिए.
देवघर. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला वसंत पंचमी का पर्व न केवल ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक है, बल्कि यह दिन ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन प्रकृति भी मानो पीत वस्त्र धारण कर उल्लास का संदेश देती है. खेतों में सरसों के पीले फूल, वातावरण में मधुरता और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
विद्यार्थियों के लिए खास दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन ही ब्रह्मा जी के मुख से मां सरस्वती प्रकट हुई थीं. तभी से यह दिन विद्या, बुद्धि और विवेक की साधना के लिए विशेष महत्व रखता है. खासकर बच्चों और विद्यार्थियों के लिए यह पर्व अत्यंत फलदायी माना गया है. इसी दिन विद्यारंभ संस्कार, लेखन आरंभ और शिक्षा से जुड़े शुभ कार्य किए जाते हैं.
मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की आराधना करने से बुद्धि प्रखर होती है और जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलता है. अगर आप भी बसंत पंचमी के दिन पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं पूजा विधि.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने जानकारी देते हुए कहा कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल 23 जनवरी को बसंत पंचमी है. माता सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है. देवी सरस्वती को शारदा, ब्रह्मचारिणी और जगन्माता भी कहा जाता है.
विद्यार्थियों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को माता सरस्वती की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए. इसके साथ ही जो लोग लेखन, संगीत, कला जैसे कार्यों से जुड़े हैं, उन्हें भी देवी सरस्वती की स्तुति अवश्य करनी चाहिए.
वसंत पंचमी की पूजा विधि
वसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ मन से पूजा का संकल्प लें. पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये रंग ज्ञान और पवित्रता के प्रतीक हैं. घर के ईशान कोण या किसी स्वच्छ स्थान पर माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें. माँ सरस्वती को पीले फूल, पीला चंदन, अक्षत, दूर्वा, फल और मिठाई अर्पित करें.
इस मंत्र का करें जाप
विशेष रूप से पीले चावल, केसरयुक्त खीर या बूंदी का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है. विद्यार्थी अपनी पुस्तकें, कॉपियां और कलम माँ के चरणों में रखें, वहीं संगीत, कला और लेखन से जुड़े लोग अपने वाद्य यंत्र और उपकरणों की पूजा करें. पूजा के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें. इससे एकाग्रता बढ़ती है और ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. अंत में माँ सरस्वती की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए Bharat.one Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
