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Jamshedpur Saraswati Puja: जमशेदपुर में 31 फीट ऊंची मां सरस्वती की प्रतिमा सरस्वती पूजा का मुख्य आकर्षण है. जिसे कोलकाता के कारीगर बनाते हैं. पिछले चार वर्षों से लगातार 31 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है.
सरस्वती पूजा को लेकर जमशेदपुर में हर साल विशेष उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन शहर में बनने वाली 31 फीट ऊंची मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा इसे एक अलग पहचान दिलाती है. यह विशाल प्रतिमा न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनती है, बल्कि अपनी भव्यता और कलात्मकता के कारण पूरे शहर में चर्चा का विषय भी रहती है. सरस्वती पूजा के मौके पर दूर-दूर से लोग इस प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
पूजा समिति के मुख्य संरक्षक प्रहलाद लोहरा जानकारी देते हुए बताते हैं कि यूं तो इस स्थान पर सरस्वती पूजा कई वर्षों से होती आ रही है, लेकिन पिछले चार वर्षों से लगातार 31 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है. उनका कहना है कि प्रतिमा बनाने में करीब दो लाख रुपये के आसपास खर्च आता है. इतनी विशाल और आकर्षक मूर्ति को तैयार करना आसान नहीं होता, इसके लिए खास तैयारी और अनुभवी कारीगरों की जरूरत पड़ती है.
प्रहलाद लोहरा बताते हैं कि इस प्रतिमा को बनाने के लिए कोलकाता से विशेष कारीगरों की टीम हर साल लगभग एक महीने पहले जमशेदपुर पहुंच जाती है. ये कारीगर दिन-रात मेहनत कर मां सरस्वती की प्रतिमा को आकार देते हैं. मूर्ति की बारीक नक्काशी, चेहरे की भाव-भंगिमा और रंग-रूप को खास तौर पर इस तरह तैयार किया जाता है कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.
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विशेष बात यह है कि 31 फीट ऊंची इस प्रतिमा को ट्रॉली के ऊपर ही बनाया जाता है. इसका उद्देश्य यह है कि विसर्जन के समय किसी तरह की परेशानी न हो और उसी ट्रॉली के साथ मां सरस्वती का विधिवत विसर्जन किया जा सके. यह व्यवस्था सुरक्षा और सुविधा दोनों को ध्यान में रखते हुए की जाती है.
पूजा समिति के अनुसार, 22 तारीख को संध्या 7 बजे मां सरस्वती की प्रतिमा का पट खुलेगा, जिसके साथ ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा. वहीं, 28 तारीख को विधिवत विसर्जन किया जाएगा. इस पूरे अवधि के दौरान पूजा पंडाल में रोजाना कुछ न कुछ विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे .
कार्यक्रमों की श्रृंखला में बच्चों के लिए नृत्य, गीत-संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सिंगिंग प्रतियोगिता, भजन संध्या, जादूगर का कार्यक्रम और श्रद्धालुओं के लिए भोग की भी विशेष व्यवस्था रहेगी. पूजा समिति का उद्देश्य है कि यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित न रहे, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाए.
