हरिद्वार: यदि आप पुत्र प्राप्ति के लिए अनेकों उपाय करके थक चुके हैं और आपको निराशा हाथ लगी है, तो यह खबर आपके लिए बेहद ही उपयोगी होगी. हिंदू धर्म में पुत्र प्राप्ति के अनेक उपाय का वर्णन किया गया है, लेकिन एक खास तिथि ऐसी आती है जिस पर श्रद्धा भक्ति भाव, पवित्र ह्रदय और विधि विधान से व्रत करने पर पुत्र की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है. साल भर 24 एकादशियों का आगमन होता है जिनका व्रत करना विशेष फलदाई माना गया है.
सभी एकादशी में पुत्रदा एकादशी सबसे अधिक फलदाई होती है. वंश वृद्धि के लिए इस दिन पुत्रदा एकादशी का व्रत करने पर अमोघ फल की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है जिससे दांपत्य जीवन में भी खुशियों की बहार आ जाती है. संतान सुख से वंचित दंपति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत एक वरदान है. चलिए विस्तार से जानते हैं…
पुत्रदा एकादशी का महत्व
पुत्रदा एकादशी व्रत की ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान धर्माचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि साल में यानी संवत में 24 एकादशियों का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. सभी एकादशियों का अपना-अपना महत्व होता है. संतान पक्ष से वंचित या पुत्र प्राप्ति करने के लिए पोस्ट शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी का आगमन होता है यदि इस व्रत को दंपत्ति विधि विधान से करते हैं, तो उनकी सभी मनोकामनाएं विष्णु भगवान की कृपा से पूर्ण हो जाती हैं.
साल 2025 में पुत्रदा एकादशी 30 और 31 दिसंबर को होगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि विष्णु भगवान को समर्पित होती है. इस दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार सफेद रंग की वस्तुओं का दान करने पर जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं.
कब और कैसे करें पूजा
पंडित श्रीधर शास्त्री आगे बताते हैं कि पुत्रदा एकादशी व्रत 30 और 31 दिसंबर को किया जाएगा. 30 दिसंबर की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने सभी कार्यों से निवृत होकर भगवान विष्णु की आराधना पूजा, पाठ करें और व्रत का संकल्प करें. पुत्रदा एकादशी के व्रत को पवित्रता और मन में अच्छे भाव रखते हुए पूर्ण करें. विष्णु भगवान को समर्पित यह व्रत सूनी गोद को भरने वाला और परिवार की खुशियों को बढ़ाने वाला होता है.
किन चीजों से रहें दूर
इस व्रत की अवधि में मन में दुर्भावना, गलत विचार, किसी का अहित करना आदि सोच विचारों से दूर रहना और तामसिक वस्तुओं का सेवन, अंडा, मांस, शराब पूर्ण रूप से वर्जित होती हैं. पुत्रदा एकादशी का व्रत वंश को आगे बढ़ाने पुत्र का वरदान और भाग्य के सभी द्वारा खोलकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला होता है पोस्ट शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का क्षय होने के कारण दशमी तिथि को यह व्रत किया जाएगा जो दो दिन 30 और 31 दिसंबर को किया जाएगा.
