Agency:Bharat.one Madhya Pradesh
Last Updated:
Baneshwar Mahadev Temple: मध्य प्रदेश के खरगोन में बाणेश्वर महादेव मंदिर है. इस मंदिर की महिमा गजब है. मान्यता है कि यहां महादेव ने त्रिपुरासुर का वध किया था. महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
बाणेश्वर महादेव मंदिर
हाइलाइट्स
- बाणेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा नदी के बीच स्थित
- महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ है उमड़ती
- मंदिर का शिखर ध्रुव तारे की सीध में बना हुआ
खरगोन. मध्य प्रदेश की धार्मिक एवं पवित्र नगरी महेश्वर में भगवान शिव के अनगिनत मंदिर हैं. इसे गुप्त काशी भी कहा जाता है. उन्हीं में से एक है बाणेश्वर महादेव मंदिर, जो मां नर्मदा नदी के बीचोबीच एक हजार वर्ष से न सिर्फ अपने इतिहास को समेटे हुए है, बल्कि लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी जगह भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था. हालांकि, इस मंदिर से जुड़ी और भी कई कथाएं प्रचलित हैं. महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
साहित्यकार, लेखक एवं इतिहास के जानकर हरीश दुबे बताते हैं कि मां नर्मदा के बीच बना यह शिव मंदिर काफी प्राचीन है. लगभग एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना हो चुका है. अहिल्याबाई होलकर ने 1700 ईस्वी में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कहा जाता है कि एक दैत्य का आतंक चहुंओर फेल गया था. तब भगवान शिव ने नगर के ज्वालेश्वर मंदिर से बाण चलाकर त्रिपुरासुर नामक दानव का वध इस जगह किया था, इसलिए मंदिर का नाम बाणेश्वर महादेव मंदिर हुआ.
माना जाता है पृथ्वी का केंद्र बिंदु
अन्य मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर द्वापर युग से स्थापित है. बाणासुर ने इसी जगह भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस जगह को पृथ्वी का केंद्र बिंदु भी माना जाता है. कहते हैं कि बाणासुर पृथ्वी के केंद्र में शिवलिंग की स्थापना करके वहां तपस्या करना चाहता था. भूदेवी से पृथ्वी का केंद्र बिंदु जानना चाहा तो भूदेवी ने बाणासुर का महेश्वर में नर्मदा के बीच इस स्थान को ही केंद्र बिंदु बताया. तब उसने यहां शिवलिंग की स्थापना की और इस क्षेत्र को एक टापू में बदल दिया.
ध्रुव तारे की सीध में बना शिखर
एक किंवदंती के अनुसार, मंदिर का शिखर ध्रुव तारा (ध्रुव नक्षत्र) के बिलकुल सीध में बना हुआ है. अगर ध्रुव तारे से एक सीधी रेखा खींची जाए तो वह मंदिर के शिखर से होते हुए गुजरेगी. यहीं नहीं, मंदिर की बनावट भी बेहद अलग है. त्रिभुजाकार में मंदिर की दीवारें बनी हैं. गर्भगृह में बाणेश्वर महादेव को गोलाकार योनिपीठ के भीतर स्थापित किया गया है. इस मंदिर को तिल बाणेश्वर भी कहा जाता है. मान्यता है कि शिवलिंग हर साल तिल-तिल बढ़ता है.
Khargone,Madhya Pradesh
February 16, 2025, 08:52 IST
महाशिवरात्रि: यहां करें दर्शन, नर्मदा के बीच में..पृथ्वी का केंद्र है ये मंदिर
