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Holi 2025: बुंदेलखंड में मवेशियों को बुरी नजर और बीमारियों से बचाने के लिए गोबर से चंदा, सूरज और ग्रहों की माला बनाई जाती है. यह माला गौशाला में लटका दी जाती है, जो एक साल तक वहीं रहती है. मान्यता है कि इससे मव…और पढ़ें
फागें
हाइलाइट्स
- होली पर मवेशियों को बुरी नजर से बचाने के उपाय
- गोबर से चंदा, सूरज और ग्रह बनाकर माला तैयार की जाती है
- गौशाला में माला लगाने से मवेशियों पर मुसीबत का प्रभाव कम होता है
सागर. धार्मिक संस्कृति हमें प्रकृति के साथ जीना सिखाती है. हर त्योहार उत्साह और उमंग से भर देता है. सदियों से चली आ रही कई परंपराएं आज भी जीवंत हैं. बुंदेलखंड में लोग अपने मवेशियों को बुरी नजर और बीमारी से बचाने के लिए एक विशेष उपाय करते हैं. इसमें वे गोबर से चंदा, सूरज और अन्य ग्रह बनाकर उनकी माला तैयार करते हैं और अपनी गौशाला में लगा देते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से मवेशियों पर आने वाली मुसीबत का प्रभाव कम हो जाता है.
होलिका दहन के बाद गोबर से बनाई जाती हैं मालाएं
होलिका दहन के बाद से लेकर रंग पंचमी तक गाय के गोबर से छोटे-छोटे चंदा, सूरज और ग्रहों के आकार के गोले बनाए जाते हैं, जिन्हें ‘मालन’ कहा जाता है. फिर श्रद्धा के अनुसार सूरज और चांद के साथ पांच, सात, नौ या ग्यारह ग्रहों की माला बनाई जाती है. इसके बाद गौशाला में रस्सी से इसे बांध दिया जाता है. यह एक साल तक वहीं लटकी रहती है और तब तक नहीं हटाई जाती जब तक यह खुद गिर न जाए.
बुजुर्गों की मान्यता और परंपरा
गांव की बुजुर्ग दादी द्रौपदी बाई बताती हैं कि हर घर में मवेशी होते हैं और उनकी गौशाला घर के सामने होती है. जब कोई रोग या परेशानी आती है, तो उसका असर सबसे पहले मवेशियों और गौशाला पर पड़ता है. वे इसे अपने ऊपर लेकर इंसानों को बचाते हैं. इसलिए मवेशियों की रक्षा के लिए यह उपाय किया जाता है. यह परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे निभा रहे हैं.
गौशाला का महत्व
दादी आगे बताती हैं कि घर के आगे गौशाला बनाने और उसमें मवेशी रखने का भी यही कारण है. घर पर आने वाली कोई भी नकारात्मक ऊर्जा या बुरा प्रभाव पहले गौशाला पर पड़ता है. इससे इंसानों को कम नुकसान होता है. इसी विश्वास के चलते गौशाला को हमेशा घर के सामने ही बनाया जाता है.
Sagar,Madhya Pradesh
March 14, 2025, 15:21 IST
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