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श्री राम और माता सीता ने यहां की थी पूजा..! आरंग के शिव मंदिर का रामायण से जुड़ा है इतिहास, तीनों युगों का रहा साक्षी, जानें सच्चाई

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Arang Chhattisgarh Ancient Shiv Temple: आरंग में एक प्रचीन शिव मंदिर आज भी मौजूद है, जिसको लेकर दावा है, जब भगवान राम वनवास के दौरान महानदी के किनारे यात्रा कर रहे थे, तब वे आरंग पहुंचे और इस प्राचीन शिव मंदिर …और पढ़ें

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शिव मंदिर

हाइलाइट्स

  • आरंग का शिव मंदिर रामायण काल से जुड़ा है?
  • भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने यहां पूजा की थी?
  • महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन होंगे.

रायपुर – आगामी 26 फरवरी को बड़े ही धूमधाम के साथ भगवान भोलेनाथ का प्रिय दिन यानी महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा. ऐसे में आज हम आपको छत्तीसगढ़ के ऐसे मंदिर के बारे में बताने वाले हैं जिसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है. राजधानी से महज 38 किमी दूर महासमुंद जिले में स्थित आरंग का प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर त्रेता युग से जुड़ा हुआ है, जहां भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान ठहरकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी. यह मंदिर तीनों युगों त्रेता, द्वापर और कलियुग का साक्षी रहा है और इसकी वास्तुकला अद्वितीय है.

भगवान श्री कृष्ण भी आए थे यहां मोरध्वज की परीक्षा लेने
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान राम वनवास के दौरान महानदी के किनारे यात्रा कर रहे थे, तब वे आरंग पहुंचे और इस प्राचीन शिव मंदिर में ठहरे. मंदिर का उल्लेख रामवन गमन पथ के 98वें पड़ाव के रूप में भी होता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है. द्वापर युग में भी भगवान श्रीकृष्ण यहां राजा मोरध्वज की परीक्षा लेने आए थे. 11वीं सदी में राजा मोरध्वज द्वारा निर्मित यह मंदिर नागर शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला को प्रदर्शित करता है. इसमें 108 खंभे हैं, जिनमें 24 खंभे मंदिर के मंडप के अंदर हैं, जो 24 घंटे के समय चक्र का प्रतीक हैं, जबकि 84 खंभे चारदीवारी के रूप में हैं, जो 84 लाख योनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

मान्यता है दर्शन से ही पूरे हो जाते हैं काम
मंदिर के इतिहास के जानकार डॉ. तेजकुमार जलक्षत्री ने बताया की इस मंदिर की विशेषता यह है कि रोज भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तरह किया जाता है. साथ ही, सूर्य की पहली किरण प्रत्यक्ष रूप से शिवलिंग पर पड़ती है, जो इसकी अद्भुत ज्योतिषीय संरचना को दर्शाता है. आगे वे बताते हैं, कि महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और पंचामृत स्नान के साथ – साथ भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया जाएगा. भजन-कीर्तन, महाआरती और रात्रि जागरण का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे.

वे बताते हैं, कि महाशिवरात्रि के दिन यहां दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है. वहीं, महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आरंग का यह प्राचीन शिव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्रदान करेगी.  भगवान श्री राम के पदचिह्नों से जुड़े इस मंदिर में शिवरात्रि के विशेष आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी होगा.

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आरंग का वो मंदिर जहां श्री राम और माता सीता ने की थी पूजा! जानें पूरी कहानी…

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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