छतरपुर. जिले के महाराजपुर गांव में स्थित प्रसिद्ध मंदिर बिदेही बाबा जहां सर्पदंश के मरीज ठीक होते हैं. मान्यता है कि इस मेले पर जो भी व्यक्ति पहुंचता है उसे सबसे पहले मंदिर पर नारियल पान बताशा चढ़ाना होता है. इसके बाद ही वह मेला घूमता है और सामान खरीदकर घर जाता है.
बैदेही बाबा मंदिर के पुजारी राजकुमार तिवारी Bharat.one से बातचीत में कहते हैं कि यह स्थान राजाओं के जमाने का है. एक राजा ही यहां आए थे और एकांत इस जंगल में रहने लगे. कुछ समय पश्चात उन्होंने जिंदा समाधि ले ली. आज मंदिर भी इसी समाधि के ऊपर बना है. यहां जो भी सर्पदंश का मरीज आता है, ठीक होकर ही जाता है.आज भी उनका आशीर्वाद यहां आने वाले लोगों को मिलता है. बता दें, इस स्थान पर एक नाग देवता भी रहते हैं जिसकी पुजारी ही देखभाल करते हैं.
100 साल से भी पुराना है मेला
पुजारी बताते हैं कि यहां 100 साल से मेला लग रहा है. ये मेला पुरखों से लगता आ रहा है. हर दिन इस मेले में हजारों-लाखों श्रद्धालु आते हैं. इस स्थान की मान्यता मान्यता है कि यहां की धरती पर जो भी पग रखता है उसे सबसे पहले बिदेही बाबा महाराज के यहां परिक्रमा लगाना होता है. इसके बाद नारियल पान बताशा चढ़ने की परंपरा है. फिर यहां मेला घूमने की मान्यता है. मेला देखने से ज्यादा लोग यहां बिदेही बाबा महाराज के दर्शन करने आते हैं. इस मेले सिर्फ एमपी से ही नहीं बल्कि यूपी से भी लोग आते हैं.
सांप काटे टे तो ऐसे होता है उपचार
पुजारी राजकुमार तिवारी के मुताबिक यदि किसी को सांप काट ले तो सबसे पहले बैदेह बाबा की जय बोलकर बालों में गांठ लगा ले, इसके बाद घी-कालीमिर्च पी ले लेकिन पानी नहीं पीना हैं. इसके तुरंत बाद बैदेही बाबा मंदिर आना हैं और बाबा की जय बोलकर परिक्रमा लगाना हैं. कितना भी जहरीले सांप ने काटा हो बाबा उसे बचा लेंगे.
यहां आने के बाद कोई भी सर्पदंश का व्यक्ति नहीं मरा
पुजारी राजकुमार के मुताबिक यदि जिंदा हालत में यहां कोई सांप का मरीज आया है तो फिर यहां से जीवित ही गया है. हर दिन सर्पदंश के 20-25 मरीज़ आते हैं और ठीक होकर जाते हैं. कई बार तो रात में भी आते हैं फिर हम भी घर से भागकर मंदिर आते हैं और परिक्रमा लगवाकर उपचार करवाते हैं.
FIRST PUBLISHED : December 19, 2024, 21:06 IST
