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Sitamarhi Shivhar Shiva Mandir : सीतामढ़ी और शिवहर के प्राचीन शिव मंदिर जैसे हलेश्वर स्थान, भुवनेश्वर महादेव, ईशाननाथ, बाल्मिकेश्वर नाथ और नागेश्वर नाथ पर पर्वों पर हजारों श्रद्धालु पूजा करते हैं.
सीतामढ़ी और शिवहर जिला शिवभक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिरों में स्थापित शिवलिंगों से जुड़ी पौराणिक कथाएं इन्हें विशेष बनाती हैं. नए साल, बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि, सावन और अन्य शुभ अवसरों पर हजारों श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं.
गिरमिसानी स्थित हलेश्वर स्थान का शिवलिंग अत्यंत प्राचीन माना जाता है, जिसकी स्थापना राजा जनक द्वारा किए जाने की मान्यता है. रामायण काल से जुड़ा यह मंदिर रामेश्वरम से भी प्राचीन बताया जाता है. नए साल पर यहां नेपाल सीमा तक से श्रद्धालु जल अर्पित करने पहुंचते हैं और गहरी आस्था का अनुभव करते हैं.
देकुली धाम में स्थित भुवनेश्वर महादेव मंदिर महाभारत कालीन धार्मिक स्थल है. यह मंदिर सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी समेत आसपास के जिलों और नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है. नए साल के अवसर पर हजारों भक्त यहां जलाभिषेक कर भगवान शिव की आराधना करते हैं.
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बेलसंड प्रखंड के दमामी गांव में स्थित दमामी मठ (ईशाननाथ मंदिर) स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. बाबा ईशाननाथ महादेव का यह प्राचीन धाम भक्तों के लिए शांति और भक्ति का केंद्र है. नए साल और अन्य पर्वों पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर जल अर्पित करते हैं.
सुरसंड स्थित बाल्मिकेश्वर नाथ महादेव मंदिर एक प्राचीन शिवधाम है. मान्यता है कि इसकी स्थापना ऋषि वाल्मीकि ने की थी. भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित यह मंदिर नए साल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आकर्षित करता है, जहां भक्त जल चढ़ाकर भोलेनाथ से मनोकामना करते हैं.
पुपरी का नागेश्वर नाथ शिव मंदिर स्वयंभू शिवलिंग के लिए जाना जाता है। सावन, महाशिवरात्रि, नए साल और रविवार को यहां विशेष भीड़ उमड़ती है. यह मंदिर पुपरी का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु पूरे विश्वास के साथ भगवान शिव की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर के तर्ज पर बना हुआ है.
