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खंडवा जिले में मौजूद महादेवगढ़ शिव मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है. बल्कि इतिहास, आस्था और परंपरा का ऐसा संगम है, जो हर भक्त के मन में एक अलग ही शांति भर देता है. शहर के पुराने इतवारा बाजार में स्थित मंदिर 12वीं सदी की एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है.
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मौजूद महादेवगढ़ शिव मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है. बल्कि इतिहास, आस्था और परंपरा का ऐसा संगम है, जो हर भक्त के मन में एक अलग ही शांति भर देता है. शहर के पुराने इतवारा बाजार में स्थित मंदिर 12वीं सदी की एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है. इसकी पहचान सिर्फ इसके प्राचीन रूप से नहीं, बल्कि उस अनोखी परंपरा से भी है, जो इसे खास बनाती है.यहां 24 घंटे “ॐ नमः शिवाय” का अखंड जाप होता है.मंदिर में कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा हुआ है.
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर परमार काल में बनाया गया था. उस समय मालवा क्षेत्र में पत्थरों पर नक्काशी और गहरे आध्यात्मिक भाव से जुड़ी स्थापत्य कला बड़ी तेजी से विकसित हो रही थी. महादेवगढ़ मंदिर भी उसी शैली की मिसाल है. मंदिर के मुख्य द्वार और गर्भगृह के आसपास लगे पत्थरों पर बनी सुन्दर नक्काशी आज भी लोगों को मध्यकालीन कला की याद दिलाती है. मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है. श्रद्धालु इसी वजह से श्रद्धालु अत्यंत जागृत स्थान कहते हैं.
शिव स्वयंभू रूप में विराजते
मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल ने कहा कि उनके साथ कई लोग मंदिर में सेवा देते है. उनका कहना है कि यह सिर्फ मंदिर नहीं, यह हमारी विरासत है. यहां शिव स्वयंभू रूप में विराजते हैं. अखंड जाप के कारण मंदिर का माहौल हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है. वे बताते हैं कि सुबह से लेकर रात तक यहां पूजा-अर्चना, भजन और जाप निरंतर चलते रहते हैं. इस जाप में स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले भक्त भी शामिल होते हैं.
महादेव जीवन की परेशानियों को हल्का कर देते
मंदिर की खासियत यह है कि चाहे आप किसी भी समय यहां आओ—सुबह, दोपहर, शाम या रात—मंदिर में ॐ नमः शिवाय की धुन हमेशा सुनाई देती है. यह निरंतर गूंज न सिर्फ मन को शांत करती है, बल्कि एक अजीब सी दिव्य ऊर्जा का अनुभव भी कराती है.कई श्रद्धालु कहते हैं कि यहां कुछ देर बैठने मात्र से ही मन का भारीपन दूर हो जाता है और जैसे स्वयं महादेव जीवन की परेशानियों को हल्का कर देते हैं.इतवारा बाजार के बीचों-बीच स्थित होने के बावजूद मंदिर के अंदर का माहौल हमेशा शांत रहता है. बाहर बाजार की चहल-पहल रहती है. लेकिन जैसे ही मंदिर के परिसर में कदम रखते हैं. एक अलग ही सुकून महसूस होता है. आसपास दुकानों, छोटे-छोटे घरों और पुरानी गलियों के बावजूद यह मंदिर अपने ऐतिहासिक रूप और आध्यात्मिक खूबसूरती को आज भी संजोए हुए है.
एक अजीब मिलता है संतोष
मंदिर से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि यहां आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होते देख चुके हैं. कोई नए काम की शुरुआत यहां से करता है. कोई जीवन के संघर्षों से राहत पाने के लिए बैठकर शिव नाम का जाप करता है. कई भक्त बताते हैं कि मंदिर से निकलते समय मन में एक अजीब संतोष साथ लेकर जाते हैं.
