सनन्दन उपाध्याय/बलिया: 550 साल प्राचीन कालखंड में बना एक ऐसा सिद्ध मठ जो किसी किले से कम नहीं है. यह वनखंडी मठ के नाम से विख्यात है. महान संत से जुड़ी इस किलेनुमा मठ की कहानी बड़ी रोचक है. इसके अंदर नवदुर्गा, 10 महाविद्या और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भव्य स्थापना की है. यह स्थान पर्यटन के साथ-साथ एक बहुत बड़ा धार्मिक स्थल भी है. इस रमणीक स्थान पर दर्शन करने वालों की भारी भीड़ होती है. ऐसी मान्यता है कि यहां न केवल मन को शांति मिलती है बल्कि, मांगी हुई हर मुराद भी पूरी होती है.
प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय बताते हैं कि यह वनखंडी नाथ मठ सरयू नदी के उत्तर तट पर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर तहसील में स्थित है. यह मठ बहुत प्राचीन है और इसकी स्थापना खगेन्द्र भारती महान संत ने की थी. इस संत का कोई वास्तविक नाम नहीं है. इन्हें खगेन्द्र भारती इसलिए कहा जाता था, क्योंकि ये पक्षियों (खग) की भाषा जानते थे.
महान संत से राजा की कुछ यूं हुई थी मुलाकात
बलिया में कंसो पटना में एक राजा थे, जिनकी कोई संतान नहीं थी. राजा घूमते घूमते गंडकी नदी के किनारे पहुंच गए. गंडकी नदी नेपाल से निकलती है, जिसमें शालिग्राम पत्थर पाए जाते हैं. इसी नदी की परिक्रमा करते समय राजा की मुलाकात इस महान संत से नेपाल में हुई थी. इसी संत के आशीर्वाद से राजा को पुत्र प्राप्ति यानी उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ.
महान संत के लिए नेपाल नरेश ने की थी मठ की स्थापना
बलिया के राजा ने बार-बार निवेदन किया तो यह महान संत खुद एक बार इस राजा से मिलने नेपाल से बलिया आए थे. राज दरबार होने के कारण भीड़ बहुत होती थी इसलिए, यह संत सरयू नदी के किनारे जंगल में रहते थे. कुछ साल बाद नेपाल नरेश अपने संत को ढूंढते हुए बलिया आ गए. नेपाल नरेश ने आग्रह किया कि बाबा अब चलिए तो इन्होंने कहा कि मुझे यहां ठीक लग रहा है. अंत में बाबा के लिए खुद नेपाल नरेश ने बलिया में ही भव्य मठ की स्थापना करा दी.
इस मठ की कुछ बड़ी खासियत…
यह मठ क्षेत्र को बाढ़ से बचाने का काम करता है. इसमें ऐसे ऐसे सिद्ध संत हुए जो स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिए. अभी इस मठ में नवदुर्गा, 10 महाविद्या और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना बहुत भव्य तरीके से की गई है. ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुरादे भी पूरी होती है. अभी इस मठ की देखभाल स्वामी ईश्वर दास ब्रह्मचारी मौनी बाबा कर रहे हैं. यह एक रमणीक और सिद्ध मठ है.
FIRST PUBLISHED : October 13, 2024, 13:16 IST
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