7 Horses Name Of Sun : भारतीय संस्कृति में सूर्य सिर्फ एक ग्रह नहीं, बल्कि जीवन देने वाली शक्ति माने जाते हैं. सुबह की पहली किरण जब धरती पर पड़ती है, तो मानो हर चीज़ में ऊर्जा भर जाती है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य देव के रथ में सात घोड़े क्यों होते हैं? और क्या इन घोड़ों का कोई मतलब भी है या बस यह एक कल्पना है? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
सूर्य के सात घोड़ों के नाम
जिन सात घोड़ों की बात की जाती है, उनके नाम हैं गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति. ये नाम सुनने में भले कठिन लगें, लेकिन इनका रिश्ता हमारे रोज़मर्रा के जीवन और सोच से जुड़ा हुआ है.
इन घोड़ों को सात रंगों का प्रतीक भी माना जाता है जैसे इंद्रधनुष के सात रंग. वैज्ञानिक रूप से भी जब सूर्य की रोशनी प्रिज़्म से गुजरती है, तो यही सात रंग दिखाई देते हैं. इस तरह ये घोड़े हमें याद दिलाते हैं कि जीवन एक रंग नहीं, बल्कि कई रंगों का मेल है.
रथ की बनावट भी खास है
सूर्य देव का रथ कोई आम रथ नहीं है. इसमें सिर्फ एक पहिया होता है, जो एक साल का संकेत देता है. उस पहिये में 12 तीलियां होती हैं, जो साल के 12 महीनों को दर्शाती हैं. यह हमें समय की अहमियत बताता है कि हर दिन, हर महीना मायने रखता है.
रथ को चलाने वाले हैं अरुण देव – ये वही हैं जिनके हाथों में लगाम होती है. वे सूर्य के रथ को नियंत्रित करते हैं. यह बताता है कि अगर ज़िंदगी को सही दिशा में ले जाना है, तो नियंत्रण ज़रूरी है – भावनाओं पर, इच्छाओं पर और अपने रास्ते पर.
जीवन से जुड़ा है इनका सीधा रिश्ता
मान्यता है कि अगर घर में सूर्य के सात घोड़ों की तस्वीर लगाई जाए, तो नकारात्मकता दूर होती है और सफलता के रास्ते खुलते हैं. यह तस्वीर साहस, आत्मविश्वास, स्थिरता और सकारात्मक सोच का प्रतीक बन जाती है.
इन सात घोड़ों को जीवन की सात ज़रूरी बातों से जोड़ा जाता है – मेहनत, समझदारी, धैर्य, ज्ञान, आत्मबल, आनंद और संतुलन. जब ये सभी बातें साथ चलती हैं, तब ही जीवन का रथ सही मायनों में आगे बढ़ता है.
