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Bhishma Dwadashi 2026 Date: माघ शुक्ल द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी मनाते हैं. भीष्म द्वादशी को व्रत रखकर पूजा, तर्पण, स्नान, दान आदि करते हैं. इससे पितृ दोष से मुक्ति, आरोग्य और विष्णु कृपा से मोक्ष मिलता है. आइए जानते हैं कि भीष्म द्वादशी कब है, आज या कल? भीष्म द्वादशी मुहूर्त और महत्व क्या है?
Bhishma Dwadashi 2026 Date: भीष्म द्वादशी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है. पहला भीष्म और दूसरा द्वादशी तिथि. भीष्म महाभारत के सबसे मजबूत पात्रों में से एक हैं, जो हस्तिनापुर के राजा शांतनु और गंगा के पुत्र थे. द्वादशी तिथि, पंचांग के अनुसार कृष्ण और शुक्ल पक्ष की 12वीं तिथि को कहा जाता है. कुछ जगहों पर इसे भीष्म एकादशी भी कहते हैं. भीष्म द्वादशी का संंबंध पितामह भीष्म से है. इस दिन उपवास और पूजा करते हैं. इससे बीमारियां दूर होती हैं, आरोग्य मिलता है और पाप मिटते हैं. विष्णु कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है. पितरों की तृप्ति के लिए उपाय करते हैं. भीष्म द्वादशी माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है. आइए जानते हैं कि भीष्म द्वादशी कब है, आज या कल? भीष्म द्वादशी का मुहूर्त और महत्व क्या है?
भीष्म द्वादशी की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार इस साल माघ शुक्ल द्वादशी तिथि आज 29 जनवरी को दोपहर 01:55 पी एम से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन 30 जनवरी शुक्रवार को सुबह 11 बजकर 9 मिनट पर होगा. ऐसे में भीष्म द्वादशी आज 29 जनवरी को है. भीष्म द्वादशी को तिल द्वादशी भी कहते हैं.
भीष्म द्वादशी मुहूर्त और शुभ योग
भीष्म द्वादशी पर शुभ समय: दोपहर 12:13 पी एम से दोपहर 12:56 पी एम तक
पितरों के लिए श्राद्ध कर्म समय: 11:3. एएम से दोपहर 02:30 पीएम तक
इन्द्र योग: प्रात:काल से लेकर रात 08:27 पी एम तक
मृगशिरा नक्षत्र: सुबह 07:31 ए एम से कल 05:29 ए एम तक
भीष्म द्वादशी का महत्व
भीष्म द्वादशी पर तिल का उपयोग करते हैं. नहाने, उबटन, भोजन, दान आदि में तिल का उपयोग करते हैं. जो लोग भीष्म द्वादशी पर व्रत और तिल का दान करते हैं, उनको 100 वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं. पितृ दोष से मुक्ति के उपाय करते हैं, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi Bharat.one Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 12 वर्षों का अनुभव है. डिजिटल पत्रक…और पढ़ें
