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do you know why breaking a pot in hindu funeral reason Superstition or logical | अंतिम संस्कार के आखिर में क्यों फोड़ी जाती है मटकी? इस विधि का मतलब जानते हैं आप, अंधविश्वास या लॉजिकल

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हिंदू अंत्येष्टि संस्कार में चिता की परिक्रमा करते हुए पानी से भरा मटका (घड़ा) फोड़ना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अर्थपूर्ण क्रिया मानी जाती है. मटका मानव शरीर का प्रतीक है और उसमें भरा पानी प्राण व जीवन-ऊर्जा का. मटका फूटते ही यह संदेश मिलता है कि जैसे घड़ा टूट गया, वैसे ही यह शरीर भी नश्वर है आत्मा अमर है, शरीर अस्थायी. आइए जानते हैं इस प्रथा का मुख्य लक्ष्य…

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हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद कुछ खास विधि और परंपराएं निभाई जाती हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को इनका मतलब नहीं पता होता. मृत्यु जीवन का अंतिम सच है, जिसे कोई भी टाल नहीं सकता. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कार बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक खास विधि है, अंत्यसंस्कार के समय पानी से भरा मटका फोड़ना. इस परंपरा के पीछे धार्मिक, ज्योतिष और व्यवहारिक कारण हैं. यह परंपरा बताती है कि मृत्यु अंत नहीं है बल्कि एक नई शुरुआत है. जैसे पानी मटके से निकलकर जमीन में मिल जाता है, वैसे ही आत्मा भी अपने कर्मों के अनुसार आगे बढ़ती है.

अंत्यसंस्कार में मटका फोड़ने की प्रक्रिया
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, अंत्यसंस्कार की सारी विधियां सही जानकार या ब्राह्मण के मार्गदर्शन में करनी चाहिए. मुख्य अग्नि देने वाला व्यक्ति मिट्टी का मटका कंधे पर लेकर चिता के चारों ओर घूमता है. मटके में थोड़ा पानी भरा होता है और उसमें एक छेद किया जाता है. घूमने के बाद वह मटका पीछे फेंककर फोड़ दिया जाता है. मटका फूटते ही पानी फैल जाता है, यह अंत्यसंस्कार का बहुत जरूरी हिस्सा माना जाता है.

ज्योतिष और धार्मिक महत्व
ज्योतिष के नजरिए से मिट्टी का मटका मृत शरीर का प्रतीक है और उसमें भरा पानी आत्मा का प्रतीक है. घूमते समय पानी की धार या बूंदें धीरे-धीरे गिरना मतलब शरीर और आत्मा का रिश्ता अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. जब मटका फूटता है, तो इसका मतलब होता है कि आत्मा अब शरीर से पूरी तरह आजाद हो गई है और अपने अगले सफर के लिए तैयार है. शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश इन पंचतत्वों से बना होता है. मटका फोड़ने की प्रक्रिया का मतलब है कि अब शरीर फिर से इन पंचतत्वों में मिल जाएगा. यह विधि मृत व्यक्ति के सांसारिक मोह और रिश्तों का अंत दिखाती है.

व्यवहारिक कारण
धार्मिक वजहों के अलावा इस परंपरा के पीछे कुछ व्यवहारिक मकसद भी थे. पुराने समय में अंत्यसंस्कार खुले में श्मशान में होते थे. पानी से भरा मटका फोड़ने से चिता के आसपास की जमीन गीली हो जाती थी, जिससे चिता की आग फैलने का खतरा कम हो जाता था. इस तरह यह प्रक्रिया सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी मानी जाती थी. सामाजिक और भावनात्मक महत्व – मटका फोड़ना सिर्फ एक विधि नहीं है, बल्कि मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान जताने का तरीका है. यह प्रक्रिया परिवार और समाज को यह एहसास दिलाती है कि जन्म और मृत्यु प्रकृति के नियम हैं. रिश्तों, मोह और सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर जीवन का असली मतलब समझने का यह एक मौका भी माना जाता है.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें

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