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रामभक्त हनुमानजी के मंदिर के दर्शन करने मात्र से ही सभी बुरी शक्तियां खत्म हो जाती हैं. हनुमानजी को आज तक कोई भी नहीं बांध सका है. मान्यता है कि यहां हनुमानजी के दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और नकारात्म शक्तियों से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं हनुमानजी के इस मंदिर के बारे में खास बातें…
हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को उनकी असीम ऊर्जा और शक्ति के लिए जाना जाता है. महाशक्तिशाली रावण भी भगवान हनुमान की पूंछ तक को नहीं बांध पाया था, लेकिन भारत में ऐसी जगह है, जहां हनुमान लोहे की जंजीरों में कैद हैं. आखिर उन्हें किसने कैद किया और क्यों? आज हम आपको श्री जगन्नाथ मंदिर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर बने बेड़ी हनुमान मंदिर के बारे में बताएंगे. मान्यता है कि हनुमानजी के इस मंदिर के दर्शन करने मात्र से सभी बुरी शक्तियां खत्म हो जाती हैं और भगवान भक्त की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी ईस्वी में सूर्यवंशी गजपति राजाओं ने कराया था. आइए जानते हैं हनुमानजी के इस मंदिर के बारे में…
हनुमान लोहे की बेड़ियों में कैद की कथा
उड़ीसा के पुरी समुद्र तट के पास चक्र तीर्थ रोड पर बेड़ी हनुमान मंदिर स्थित है. यहां हनुमान लोहे की बेड़ियों में कैद हैं. समंदर के पास होने की वजह से इस मंदिर को दरिया महावीर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. भगवान हनुमान भले ही यहां बेड़ियों से बंधे हैं, लेकिन वे पुरी के रक्षक के तौर पर सालों से यहां विराजमान हैं. माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए समुद्र देवता जब भी आते थे, तब पुरी के आस-पास के गांव पानी में डूब जाते थे और बहुत नुकसान होता था. एक दिन भक्तों ने अपनी परेशानी भगवान जगन्नाथ को सुनाई. भक्तों की परेशानी सुनकर भगवान जगन्नाथ ने समंदर तट के किनारे भगवान हनुमान को तैनात किया और उन्हें समुद्र देवता को रोकने का आदेश दिया.
समंदर किनारे पुरीवासियों की रक्षा कर रहे हैं हनुमानजी
अब कुछ समय तक भगवान हनुमान अच्छे से अपना कर्तव्य पूरा करते रहे, लेकिन जब भी उन्हें राम नाम का भजन-कीर्तन सुनाई देता, तो वे समंदर तट छोड़कर भजन-कीर्तन में शामिल होने के लिए चले जाते. ऐसे में समुद्र देव को मौका मिला और एक बार फिर पुरी के आसपास के गांव पानी में डूब गए और पानी जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया. ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसके लिए भगवान जगन्नाथ ने भगवान हनुमान को लोहे की बेड़ियों से बांध दिया, जिससे वे राम नाम कीर्तन सुनने के बाद भी कहीं जा ना सकें. तब से लेकर आज तक वे समंदर किनारे पुरीवासियों की रक्षा कर रहे हैं.
15वीं शताब्दी ईस्वी में कराया था निर्माण
मंदिर में भगवान हनुमान की प्रतिमा बहुत भव्य है. उनके दाहिने हाथ में गदा और बाएं हाथ में लड्डू है. माना जाता है कि यहां भक्त भगवान हनुमान से संरक्षण की मनोकामना लेकर जाते हैं. अगर किसी भक्त को जीवन में किसी से खतरा महसूस होता है, तो वे हनुमान से भय से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण और मां सीता की प्रतिमा भी मौजूद है. मंदिर की वास्तुकला की बात करें तो मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी ईस्वी में सूर्यवंशी गजपति राजाओं ने कराया था और मंदिर की दीवारों और उनके गुंबद पर पारंपरिक उड़िया शैली की झलक दिखती है.
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