इंडोनेशिया के खूबसूरत द्वीप बाली में जब सूरज उगता है तो हवा में चंदन, फूलों और नारियल के पत्तों की खुशबू फैल जाती है. पारंपरिक परिधानों में सजे लोग मंदिरों की ओर जाते नज़र आते हैं. हर घर के बाहर रंग-बिरंगे अर्पण रखे होते हैं और पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहता है. यह दृश्य किसी साधारण दिन का नहीं, बल्कि बाली के बेहद महत्वपूर्ण पर्व कुनिंगन त्योहार का होता है, जिसे वहां के लोग खुशी, कृतज्ञता और दिव्य आशीर्वाद का दिन मानते हैं.
10-दिनों के धार्मिक उत्सव
कुनिंगन, बाली के 10-दिनों के धार्मिक उत्सव का अंतिम और सबसे शुभ दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन देवात्माएं पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर स्वर्गलोक लौट जाती हैं. यही कारण है कि बाली के मंदिरों में इस दिन सुबह से देर रात तक पूजा, संगीत, नृत्य और विशेष प्रार्थनाएं चलती हैं. लोग अपने-अपने घरों में भी पीले चावल, नारियल, फूल, अगरबत्ती और पारंपरिक व्यंजनों से भगवान का स्वागत करते हैं.
गैलुंगन त्यौहार के 10 दिन बाद
कुनिंगन त्यौहार हर 210 दिनों में मनाए जाने वाले गैलुंगन त्यौहार के 10 दिन बाद आता है और यह उसी त्यौहार चक्र का समापन है. यह त्यौहार हर साल अलग-अलग तिथियों पर पड़ता है, जैसे 2025 में 3 मई और 29 नवंबर को. दिलचस्प बात यह है कि बाली के इस त्योहार का भारत से भी एक सांस्कृतिक रिश्ता जुड़ता है, खासकर जब बात आती है पूजा-पद्धति, देवताओं के प्रतीक और प्रकृति के प्रति आभार की परंपरा की. बाली की धार्मिक विरासत में भारत से पहुंचे कई सांस्कृतिक बीज आज भी जीवित हैं और कुनिंगन त्योहार उनमें से एक सुंदर झलक है.
कुनिंगन त्योहार का धार्मिक महत्व
कुनिंगन बाली के लोगों के लिए सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्सव है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह शुभता, प्रकाश और दिव्य संदेशों का प्रतीक है. इस दिन देवात्माओं का पृथ्वी पर आगमन माना जाता है. बाली के लोग इसे कृतज्ञता दिवस की तरह मनाते हैं, ईश्वर, पूर्वजों और प्रकृति के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हैं. घरों और मंदिरों में पीले चावल (कुनिंग) से विशेष भोग बनाया जाता है, जो पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है. लोग नए वस्त्र, पारंपरिक नृत्य और संगीत के साथ पर्व को धूमधाम से मनाते हैं. कुनिंगन की सबसे खास पहचान है, अर्पण का पीला रंग, जिसे दिव्यता और शुभ संकेत माना जाता है.
कुनिंगन त्योहार और भारत का संबंध
बाली का धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन भारत से सदियों पहले पहुंचे हिंदू प्रभावों से गहरे रूप में जुड़ा है. इसी कारण कुनिंगन त्योहार में कई बातों का भारतीय संस्कृति से अद्भुत साम्य दिखाई देता है. कुनिंगन त्योहार इस साझा सांस्कृतिक इतिहास की जीवित मिसाल है, जहां बाली और भारत भावनाओं, आध्यात्मिकता और परंपरा की डोर से जुड़े मिलते हैं. बाली के कई मंदिरों में भारतीय शैली की मूर्तिकला और कई स्थानों पर रामायण–महाभारत से जुड़े दृश्य देखने को मिलते हैं.
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https://hindi.news18.com/news/dharm/kuningan-festival-is-celebrated-in-bali-know-about-its-religious-significance-and-connection-to-india-ws-kl-9914390.html
