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Krishna Janmashtami 2024: श्रीकृष्ण ने राधा से प्रेम किया पर विवाह क्यों नहीं? जानिए वजह

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हाइलाइट्स

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधारानी का विवाह यशोदा के भाई रायान गोपा से हुआ था. यशोदा जी भगवान कृष्ण की मां हैं इस नाते राधारानी से उनका रिश्ता मामी का हुआ.

Krishna Janmashtami 2024: हिन्दू धर्म में 33 कोटी देवी देवताओं की पूजा की जाती है लेकिन इन सब में भगवान कृष्ण की बात आती है तो शायद ही कोई होगा जिसने इनकी लीलाओं के बारे में सुना या पढ़ा नहीं होगा. कृष्ण के भक्त आज देश ही नहीं दुनियाभर में आपको देखने को मिलते हैं. हरे कृष्ण की धुन गुनगुनाते हुए वे हर दम उनकी भक्ति में लीन रहते हैं लेकिन भगवान कृष्ण का नाम जहां आता है तो उससे पहले राधारानी का नाम लिया जाता है. जो प्रेम-त्याग, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक है. जब भी प्रेम की बात आती है तो राधा कृष्ण का नाम सबसे पहले याद किया जाता है लेकिन इतना गहरा प्रेम होने के बावजूद उन्होंने एक दूसरे से शादी नहीं की. यह प्रश्न हर किसी के मन में आता है कि आखिरकार ऐसा क्यों हुआ और इसका क्या कारण है? इसको लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, आइए जानते हैं इस रहस्य के बारे में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

किससे हुआ राधारानी का विवाह?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधारानी का विवाह यशोदा के भाई रायान गोपा से हुआ था. चूंकि, यशोदा जी भगवान कृष्ण की मां हैं इस नाते राधारानी से उनका रिश्ता मामी का हुआ और यह एक कारण माना जाता है कि भगवान कृष्ण का विवाह राधा जी से नहीं हुआ.

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि, जब बालपन में भगवान कृष्ण और राधारानी की मुलाकात हुई तो तभी उन्हें अपने प्रेम का आभास हो गया था लेकिन उस समय भी राधारानी कन्हैया जी से उम्र में 11 महीने बड़ी थीं. ऐसा कहा जाता है कि दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम होने के कारण दोनों ने एक दूसर से शादी नहीं की.

राधा-कृष्ण के विवाह का उल्लेख भी
एक अन्य पौराणिक कथा में उल्लेख है कि जब भगवान कृष्ण को बाल रूप में ही एक अद्भुत शक्ति का आभास हुआ था. उन्हें पता चल चुका था कि वो शक्ति कोई और नहीं बल्कि राधारानी हैं. जिसके बाद भगवान कृष्ण बाल अवस्था से यौवनावस्था में पहुंचे और जब ब्रह्मा जी ने राधा-कृष्ण का विवाह कराया लेकिन इसके बाद ब्रह्मा जी और राधा जी अंतरध्यान हो गए और कन्हैया फिर से बाल रूप में आ गए.

रुक्मणी को माना राधा का स्वरूप
एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण वृंदावन छोड़कर जा रहे थे जब उन्होंने राधारानी से लौटकर आने का वादा किया था लेकिन जब वे वापस लौटे तो उनकी मुलाकात रुक्मणी से हुई थी और रुक्मणी ने मन ही मन भगवान कृष्ण को अपना पति मान लिया था. जिसके बाद उन्होंने रुक्मणी से ही विवाह भी कर लिया. इसको लेकर कहा जाता है कि, भगवान कृष्ण ने रुक्मणी को राधा का स्वरूप मानकर विवाह किया था.

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