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Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन में हर साल शाकंभरी पूर्णिमा के अवसर पर मां बागेश्वरी का श्रृंगार फलों और सब्जियों से किया जाता है. यह परंपरा देवी शाकंभरी के जीवन से जुड़ी एक कथा से प्रेरित है. इस बार 13 जनवरी 2025 को…और पढ़ें
खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन में सोमवार को बागेश्वरी माता ने भक्तों को फलों और सब्जियों के रूप में विशेष दर्शन लाभ दिए. दरअसल, मां बागेश्वरी मंदिर में देवी का इस रूप में दर्शन साल में एक बार ही शाकंभरी पूर्णिमा को होता है. इस दिन माता का श्रृंगार फूलों की जगह फलों और हरि सब्जियों से किया जाता है. महाआरती के बाद श्रृंगारित फल और सब्जियां भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटी गई. देवी पुराण के अनुसार, जो पौष पूर्णिमा के दिन मां शाकंभरी माता के दर्शन करते हैं. उनका परिवार हरा-भरा रहता है.
बता दें कि, लगभग 800 वर्ष पुराने मां बागेश्वरी माता के प्राचीन मंदिर में हर साल पौष मास शुक्ल की अष्टमी से पूर्णिमा तक शाकंभरी नवरात्रि मनाई जाती है. मंदिर में शाकंभरी पूर्णिमा के दिन भव्य श्रृंगार होता है. इस बार पूर्णिमा 13 जनवरी 2025 को आई है. इस अवसर पर मां बाघेश्वरी का प्रातः 7 बजे स्नान के बाद फलों और सब्जियों से भव्य श्रंगार कर प्रातः 10.30 बजे महाआरती की गई. माता के इस अलौकिक रूप के दर्शन के लिए सैकड़ों की संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे.
– माता के इस रूप की अनोखी कहानी
मंदिर के पुजारी जगदीश ठक्कर ने बताते है कि, आज ही के दिन मां भगवती त्रिपुर सुंदरी देवी शाकंभरी के रूप में प्रकट हुई थीं. माना जाता है कि, दुर्गम दैत्य वेदों को चुराकर पाताल लोक ले गया था, जिसकी वजह से चहुंओर अकारण वर्षा होने लगी थी, जिससे अकाल और भुखमरी फैल गई. तब कुछ संत, महात्माओं ने भगवती शक्ति की उपासना की, जिससे देवी शाकंभरी प्रकट हुईं. देवी ने अपने शरीर से सब्जियां और फल उत्पन्न किए और संसार का पालन किया. इसी लिए हर साल माता के प्रकोत्सव पर फलों और सब्जियों से श्रृंगार किया जाता है.
– मौसमी फल-सब्जियों से श्रृंगार
पंडित ठक्कर ने कहां कि, सभी को सद्बुद्धि मिले, सुख-शांति एवं समृद्धि आए, इन्हीं कामनाओं के साथ माता मां बाघेश्वरी का श्रृंगार विभिन्न फलों व सब्जियों से किया गया. इनमें नारियल पानी, केले, सेवफल, पपीता, अनार, संतरा, पायनपल, शलजम, बोर, चीकू, कोतमिर, गाजर, मूली, पालक, मैथी, पत्तागोभी, गिलकी, मिर्ची, नींबू, लौकी आदि फल व सब्जियों शामिल है.
– मंदिर का पौराणिक इतिहास
शहर के ब्राह्मणपुरी क्षेत्र स्थित छः भुजाओं वाली मां बागेश्वरी का यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है. खुदाई के दौरान माता की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी. कई वर्षों से ठक्कर परिवार द्वारा मंदिर का संचालन और पूजन किया जा रहा है. मान्यता है कि माता के दर्शन करने और प्रसाद खाने से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है. दर्शन के लिए दूर दूर से भक्त आते है.
Khargone,Madhya Pradesh
January 13, 2025, 15:17 IST
खरगोन में मां बागेश्वरी का दिव्य रूप, फलों और सब्जियों से हुआ भव्य श्रृंगार
