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भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर मध्य प्रदेश में विराजमान है और इस मंदिर में मां बगलामुखी भक्तों को दर्शन दे रही हैं. भारत में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां माता की स्वयंभू मूर्ति में तीन देवियां समाहित हैं. मध्य में माता बगलामुखी, दाएं भाग में मां लक्ष्मी और बाएं भाग में मां सरस्वती विराजित हैं. माता बगलामुखी को महारुद्र (मृत्युंजय शिव) की मूल शक्ति के रूप में जाना जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
तंत्र साधना और कष्टों से मुक्ति पाने के लिए असम में मां कामाख्या देवी विराजमान हैं, लेकिन भारत के दिल यानी मध्य प्रदेश में ऐसी त्रिदेवी शक्तियां मौजूद हैं, जिन्हें राज्य की रक्षक के तौर पर पूजा जाता है. हम बात कर रहे हैं मां बगलामुखी की, जिन्हें ऊर्जा और सकारात्मक शक्तियों का उद्गम माना जाता है. यह शक्तिपीठ चारों ओर से श्मशान से घिरा हुआ है और यहां तंत्र विद्या और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए खास अनुष्ठान होते रहते हैं. आइए जानते हैं माता बगलामुखी के इस खास मंदिर के बारे में…
त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर मध्य प्रदेश के आगर जिले की तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है. बताया जाता है कि मंदिर द्वापर युग से यहां स्थापित है और उसका जुड़ाव महाभारत के युद्ध से भी है. मंदिर में शैव और शाक्त मार्गी संप्रदायों के संत और देश भर के साधु तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं. इस मंदिर में माता बगलामुखी के अलावा माता लक्ष्मी, श्रीकृष्ण, हनुमान, भैरव और सरस्वती की मूर्तियां भी विराजमान हैं.
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, अज्ञातवास के समय पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर मां बगलामुखी की कठोर तपस्या की थी और महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्त की थी. इसी वजह से इस मंदिर को शत्रुओं पर विजय पाने का स्थान कहा जाता है. बड़े से बड़ा तंत्र भी मंदिर की दहलीज पर आकर दम तोड़ देता है. तंत्र विद्या को साधने वाले अघोरी मंदिर में रात के समय विशेष पूजा अनुष्ठान करते हैं और मां से आशीर्वाद में सिद्धियां पाते हैं.
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खास बात ये है कि मंदिर चारों दिशाओं से श्मशान से घिरा है. मंदिर की हर दिशा में श्मशान होने की वजह से भी मां को तंत्र की देवी के रूप में पूजा जाता है. चारों दिशाओं में श्मशान होने के बाद भी मंदिर में एक तेज सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है. मंदिर में मां बगलामुखी का रूप बेहद अद्भुत है, जहां पीले रंग के वस्त्र और खड़ी हल्दी चढ़ाई जाती है. ये देश का पहला मंदिर है, जहां मां को प्रसन्न करने के लिए खड़ी हल्दी अर्पित की जाती है. मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, पीला रंग विजय का होता है, इसलिए मां को पीला रंग अत्यंत प्रसन्न करता है.
मंदिर में मां बगलामुखी को त्रिदेवी कहा जाता है, क्योंकि मां बगलामुखी के एक तरफ मां लक्ष्मी तो दूसरी तरफ मां सरस्वती विराजमान हैं. कष्टों से मुक्ति पाने के लिए मंदिर में कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें बगलामुखी पूजन, अनुष्ठान जप, मंत्र साधना और भवन पूजन शामिल हैं. माना जाता है कि मंदिर में किया हवन इतना शक्तिशाली होता है कि सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. मां बगलामुखी का आर्शीवाद पाने के बाद कष्ट दोबारा नहीं आ सकता है. ये मंदिर सिर्फ तंत्र साधना ही नहीं बल्कि भक्तों के मजबूत विश्वास और आस्था का केंद्र है.
