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देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल बताते है की माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती को समर्पित होता है.वर्ष 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी और इसी दिन सरस्वती पूजा का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा.
देवघरः हर वर्ष माघ शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है. यह दिन ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है. बसंत पंचमी को न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय रूप से भी वर्ष की सबसे श्रेष्ठ और शुभ तिथियों में गिना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती. बसंत पंचमी के अवसर पर विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, शिक्षा से जुड़े कार्य और अन्य शुभ संस्कार बिना किसी संकोच के संपन्न किए जा सकते हैं. इसी दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर भक्त विद्या, बुद्धि, विज्ञान, संगीत, कला और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. बसंत पंचमी में पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है जानते है देवघर के ज्योतिषाचार्य जी से?
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य जी से?
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल ने Bharat.one के संवाददाता से जानकारी देते हुए कहाँ की इस वर्ष बसंत पंचमी की तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कहीं 23 जनवरी तो कहीं 24 जनवरी को बसंत पंचमी मनाए जाने की चर्चा हो रही है. ऐसे में सही तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है. ऋषिकेश पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में 23 जनवरी को ही मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी को रात्रि 2 बजकर 28 मिनट पर हो रही है, जबकि पंचमी तिथि का समापन 24 जनवरी को रात्रि 1 बजकर 46 मिनट पर होगा. ज्योतिषाचार्य के अनुसार उदया तिथि को मान्यता देने की परंपरा के चलते 23 जनवरी को ही बसंत पंचमी मनाना शास्त्रसम्मत है. उन्होंने यह भी बताया कि यदि इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना की जाए, तो इसका विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है.
जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त:
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस दौरान मां सरस्वती की विधिवत पूजा करने से विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान साधकों को विशेष लाभ मिलेगा.सही तिथि और शुभ मुहूर्त में पूजा कर माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत फलदायी माना गया है.
बन रहा है शुभ योग:
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि इस साल यानी 2026 में बसंत पंचमी के दिन शिववास और उतराभाद्र पद नक्षत्र भी रहने वाला है. जिस वजह से बसंत पंचमी की तिथि का महत्व दोगुना हो जाता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
