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Mahabharata War: क्या श्रीकृष्ण चाहते तो महाभारत का युद्ध टल सकता था? फिर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया, यहां जानें

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Mahabharata War: महाभारत धर्म युद्ध था जिसमें भगवा नश्रीकृष्ण की अहम भूमिका थी. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण चाहते तो ये युद्ध रोका जा सकता था लेकिन उन्होंने इस युद्ध को नहीं रोका. श्रीकृष्ण ने हथियार न उठाकर हमें …और पढ़ें

क्या श्रीकृष्ण चाहते तो महाभारत का युद्ध टल सकता था?

महाभारत युद्ध स्टोरी

हाइलाइट्स

  • महाभारत धर्म युद्ध था, जिसमें श्रीकृष्ण की अहम भूमिका थी.
  • श्रीकृष्ण ने कर्म के सिद्धांत के कारण युधिष्ठिर को नहीं रोका.
  • महाभारत का युद्ध धर्म की स्थापना के लिए आवश्यक था.

Mahabharata War: महाभारत की कथा में एक महत्वपूर्ण प्रसंग है युधिष्ठिर का जुआ खेलना, जिसने पांडवों के जीवन में भूचाल ला दिया था. भगवान कृष्ण को विष्णु जी का अवतार माना जाता है. उनके पास अपार शक्तियां थीं. चाहें तो वो अकेले ही युद्ध खत्म कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. वो सिर्फ अर्जुन के सारथी बने और उसे मार्गदर्शन देते रहे. अक्सर यह सवाल उठता है कि जब श्रीकृष्ण पांडवों के इतने हितैषी थे तो उन्होंने युधिष्ठिर को जुआ खेलने से क्यों नहीं रोका? इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें से ये 5 मुख्य कारण कुछ इस तरह से हैं.

कर्म का सिद्धांत: श्रीकृष्ण गीता में कर्म के सिद्धांत का उपदेश देते हैं. वे मानते थे कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है. युधिष्ठिर ने अपनी इच्छा से जुआ खेलने का निर्णय लिया था इसलिए श्रीकृष्ण ने उनके कर्म में हस्तक्षेप नहीं किया. अगर वे ऐसा करते तो यह उनके द्वारा स्थापित कर्म के सिद्धांत के विरुद्ध होता.

धर्म की स्थापना: महाभारत का युद्ध धर्म की स्थापना के लिए आवश्यक था. अगर युधिष्ठिर जुआ नहीं खेलते तो शायद यह युद्ध नहीं होता और अधर्म का नाश नहीं होता. श्रीकृष्ण जानते थे कि इस युद्ध के माध्यम से ही धर्म की पुनर्स्थापना होगी इसलिए उन्होंने इस घटना को होने दिया.

पांडवों की परीक्षा: यह घटना पांडवों की एक परीक्षा भी थी. उन्हें अपने धैर्य, संयम और धर्म के प्रति अपनी निष्ठा को साबित करना था. इस कठिन परिस्थिति में भी उन्होंने धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा यही उनकी विजय का कारण बना.

दैवीय योजना: कुछ विद्वानों का मानना है कि यह सब एक दैवीय योजना का हिस्सा था. श्रीकृष्ण स्वयं एक अवतार थे और वे जानते थे कि भविष्य में क्या होने वाला है. इस घटना के माध्यम से ही महाभारत का युद्ध और धर्म की स्थापना संभव थी.

युधिष्ठिर का निर्णय: युधिष्ठिर एक स्वतंत्र व्यक्ति थे और उन्हें अपने निर्णय लेने का अधिकार था. युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से सलाह नहीं ली इसलिए श्रीकृष्ण को इस विषय में हस्तक्षेप करने का अवसर नहीं मिला. अगर पांडव श्रीकृष्ण से सलाह लेत तो वे निश्चित रूप से उन्हें जुआ खेलने से रोकते.

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