Tulsi Mala Pehne ke Niyam: तुलसी माला सिर्फ एक साधारण माला नहीं मानी जाती बल्कि इसे आस्था, शुद्धता और आत्मिक शांति से जोड़ा जाता है. भारतीय संस्कृति में तुलसी को माता का दर्जा दिया गया है और उनकी माला पहनना भगवान की भक्ति का प्रतीक माना जाता है. बहुत से लोग तुलसी माला पहनते तो हैं लेकिन उन्हें इसके सही नियम, पहनने का तरीका और जरूरी सावधानियों की पूरी जानकारी नहीं होती. कई बार गलत तरीके से पहनने पर मन में सवाल भी उठते हैं कि कहीं अनजाने में कोई भूल तो नहीं हो रही. ऐसे में जरूरी है कि तुलसी माला पहनने से पहले इसके नियमों को सरल भाषा में समझ लिया जाए ताकि श्रद्धा के साथ साथ सही विधि भी बनी रहे. तुलसी माला पहनने का मकसद केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानसिक शांति, सात्विक जीवन और आत्म अनुशासन से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी.
तुलसी माला पहनने के मुख्य नियम
तुलसी माला पहनते समय कुछ नियमों का पालन करना परंपरा और शास्त्रों में बताया गया है. इन नियमों का उद्देश्य व्यक्ति के विचार, व्यवहार और दिनचर्या को शुद्ध रखना माना जाता है.
सबसे पहला नियम है शुद्धता. तुलसी माला हमेशा साफ शरीर से पहननी चाहिए. सुबह स्नान करने के बाद माला धारण करना सबसे अच्छा माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे मन और तन दोनों पवित्र रहते हैं.
तुलसी माला पहनते समय भाव भी बहुत जरूरी होता है. इसे फैशन या दिखावे के लिए नहीं पहनना चाहिए. माला पहनते समय मन में भक्ति और श्रद्धा का भाव होना चाहिए. अगर इसे केवल सजावट के तौर पर पहना जाए तो इसका धार्मिक महत्व कम हो जाता है.
तुलसी माला कब पहननी चाहिए
तुलसी माला पहनने के लिए गुरुवार का दिन बहुत शुभ माना जाता है. इसके अलावा एकादशी, पूर्णिमा या किसी शुभ तिथि पर भी माला धारण की जा सकती है. कई लोग इसे रोज पहनते हैं और कई लोग विशेष पूजा पाठ के समय ही पहनते हैं.
अगर पहली बार तुलसी माला पहन रहे हैं तो सुबह के समय मंदिर या पूजा स्थान में बैठकर भगवान का स्मरण करते हुए पहनना अच्छा माना जाता है. इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है.

तुलसी माला पहनते समय क्या न करें
तुलसी माला पहनते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. कहा जाता है कि तुलसी माला पहनने वाले व्यक्ति को मांस मछली अंडा और शराब जैसी चीजों से दूरी बनानी चाहिए. इसे सात्विक जीवन से जोड़ा जाता है.
तुलसी माला पहनकर झूठ बोलना गलत व्यवहार करना या किसी का अपमान करना भी उचित नहीं माना जाता. इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति पूरी तरह गलतियों से मुक्त हो जाए लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए कि जीवन में संयम और सादगी बनी रहे.
तुलसी माला को कभी भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए. अगर माला टूट जाए तो उसे साफ कपड़े में रखकर किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए या नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए.
तुलसी माला गले में पहननी चाहिए या हाथ में
अधिकतर लोग तुलसी माला गले में पहनते हैं. यह सबसे प्रचलित तरीका है. कुछ लोग इसे कलाई में भी पहनते हैं. दोनों ही तरीके मान्य माने जाते हैं. बस ध्यान यही रखना चाहिए कि माला का अपमान न हो और उसे सम्मान के साथ पहना जाए.
सोते समय तुलसी माला उतारनी चाहिए या नहीं इस पर अलग अलग मान्यताएं हैं. कई लोग सोते समय भी माला पहने रखते हैं और कई लोग उतार देते हैं. अगर आपको लगता है कि सोते समय माला टूट सकती है या असुविधा हो सकती है तो उतार देना बेहतर है.
महिलाओं के लिए तुलसी माला पहनने के नियम
महिलाएं भी तुलसी माला पहन सकती हैं. इसमें कोई रोक नहीं है. मासिक धर्म के समय कुछ महिलाएं माला उतार देती हैं क्योंकि उस समय पूजा पाठ से दूरी रखने की परंपरा है. हालांकि यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है. महिलाओं के लिए भी वही नियम लागू होते हैं जो पुरुषों के लिए बताए गए हैं. साफ सफाई संयम और श्रद्धा सबसे जरूरी माने जाते हैं.
तुलसी माला पहनने के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी माला पहनने से मन शांत रहता है और नकारात्मक विचार कम होते हैं. इसे पहनने से व्यक्ति का ध्यान भक्ति और अच्छे कर्मों की ओर बढ़ता है. कई लोग मानते हैं कि तुलसी माला से तनाव कम होता है और मन में स्थिरता आती है. आध्यात्मिक दृष्टि से तुलसी माला जप और ध्यान में सहायक मानी जाती है. यह व्यक्ति को अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देती है.
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