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kandmul fal ke fayde : भगवान राम के वनवास से दुनिया को कई चीजें सीखने को मिलती हैं. उनका आहार भी इनमें से एक है. इस दौरान उन्होंने जो खाया, हमेशा से चर्चा में रहा. आज हम उसी के बारे में चर्चा करेंगे. ये फल करीब 11 साल तक प्रभु का मुख्य आहार बना रहा है. जंगल के बीच पाया जाने वाला ये फल चित्रकूट में आज भी खूब बिकता है.
Kandmul fal khane ke fayde/चित्रकूट. अभी तक आपने बाजारों में सेब-केले और तरह-तरह के फलों की दुकानें तो खूब देखी होंगी, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा फल देखा है जो सिर्फ विश्वास पर बिकता हो. आज हम आपको चित्रकूट के परिक्रमा मार्ग पर बिकने ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे, जो जंगली है. ये फल न सिर्फ खाने में अनोखा है, बल्कि भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक भी है. इसे यहां के लोग सामान्य फल नहीं, प्रभु श्रीराम का वनवासीय प्रसाद कहते हैं. चित्रकूट परिक्रमा पथ पर कदम रखते ही आपको लंबी लकड़ी के आकार में रखा एक फल नजर आएगा. यह फल पैकिंग या ब्रांडिंग के सहारे नहीं, बल्कि प्रसाद के रूप में बिकता है.
इसे ही क्यों खाया
कहते हैं कि जब प्रभु श्रीराम को वनवास मिला तो उन्होंने अपने 11 वर्ष 6 महीने का समय चित्रकूट में बिताया था. उस दौर में यहां के लोगों के पास उनके लिए कुछ पकाकर देने का साधन नहीं था. ऐसे में जंगलों में मिलने वाले इस कंद को ही श्रीराम की थाली में रखा जाता था. यही कंदमूल फल श्रीराम के वनवास का प्रमुख भोजन रहा. फल बेचने वाले के अनुसार, ये श्री राम का प्रसाद है. यह फल चित्रकूट और नासिक के जंगलों में मिलता है.
बसा है दिल में
चित्रकूट के पुजारी मोहित दास Bharat.one से बताते हैं कि ये कोई साधारण फल नहीं है. इसके भीतर कैल्शियम, आयरन और विटामिन-सी की प्रचुर मात्रा होती है. इसे इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है. ठंड और जुकाम के समय इसे खाने से राहत मिलती है. यह फल यहां प्रसाद रूप में मिलता है. जो भी चित्रकूट आता है, वह इसे जरूर खरीदता है. यह फल परिक्रमा मार्ग पर 10 से 20 रुपये के हिसाब से मिल जाता है. माना जाता है कि वनवास के दौरान भगवान राम का ये मुख्य आहार था, इसलिए ये फल आज भी लोगों के दिल में बसा है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
