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संस्कृति और परंपराएं हिंदुओं के जन्म से पहले ही जन्म ले चुकी थीं. मान्यताएं और भावनाएं मनुष्य के जन्म के बाद व्यवहार में आईं. इसीलिए, मनुष्य के जन्म के समय से ही कुछ मान्यताएं और मूल सिद्धांत हमारे दैनिक जीवन का मार्गदर्शन करते रहे हैं. आइए जानते हैं शव यात्रा और एंबुलेंस के पीछे-पीछे चलना क्या नुकसान दे सकता है…
आपने रास्ते में कई बार शव यात्रा और एंबुलेंस को देखा होगा. कई लोग भीड़ और ट्रैफिक से बचने के लिए शव यात्रा और एंबुलेंस के पीछे पीछे अपनी गाड़ी लगा लेते हैं, ताकि जल्दी निकल जाएं. लेकिन क्या ऐसा करना शुभ माना जाता है. क्या जल्दी निकलने के चक्कर में इनके पीछे पीछे चलना या फिर गाड़ी लगानी चाहिए. दरअसल हिंदू धर्म में सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक और कहीं बाहर जाने से लेकर घर में रहने तक कई नियम कायदे हैं और इन्हीं नियमों का पालन करने से एक व्यक्ति हिंदू बनता है. हिंदुओं में कहीं भी जाने से पहले शकुन-अपशकुन को देखना आम बता है. लेकिन इतनी सावधानी के साथ चलने पर भी कई बार जाने-अनजाने रास्ते में गलतियां हो जाती हैं. आइए जानते हैं शव यात्रा और एंबुलेंस के पीछे-पीछे चलना क्या नुकसान दे सकता है…
जाने-अनजाने कर देते हैं यात्रा में गलतियां
अगर घर से निकलते समय कुछ अपशगुन हो जाता है, तो कुछ लोग घर पर रुक जाते हैं और कुछ समय बाद घर से निकलते हैं. साथ ही कुछ लोग शुभ मुहूर्त देखकर और वाहन पूजा करके वाहन स्टार्ट करते हैं. इतना सब कुछ सोचने के बाद भी जाने-अनजाने गलतियां हो जाती हैं. यात्रा के दौरान वाहन को निकालने के लिए कुछ लोग गलतियां कर बैठते हैं. वे ना केवल सिग्नल से बचने के लिए गलत रास्ता अपनाते हैं, बल्कि ट्रैफिक जाम से निकलने के लिए शव यात्रा और एंबुलेंस के पीछे वाहन को लगा लेते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना सही माना जाता है?
पुजारी से जानें क्यों नहीं है ठीक
सड़क पर चलते हुए अगर कोई एम्बुलेंस या शवयात्रा वाहन आ जाए, तो वे सोचते रहते हैं कि अगर वे पीछे चले जाएं, तो थोड़ी देर में निकल जाएंगे. विशाखापट्टनम के पुजारी, बालासुब्रमण्यम शर्मा कहते हैं कि ऐसा करना बहुत गलत है. उनका कहना है कि सिग्नल से बचने के लिए वाहन चालकों का पीछे जाना ठीक नहीं है. उनका कहना है कि जानलेवा हालत में लोगों को ले जा रही एम्बुलेंस के पीछे नहीं जाना चाहिए. वहीं शव यात्रा वाहन के पीछे भी चलना सही नहीं माना जाता.
इसलिए शव यात्रा और एंबुलेंस के पीछे नहीं जाना चाहिए
पहले, चार लोग मृतक के शव को ले जाते थे. वे शव को ले जाते समय पीछे मुड़कर नहीं देखते थे. अगर उन्हें ऐसा करना ही पड़ता, तो वे बहुत दूर चले जाते थे. अब, चूंकि शहरों में श्मशान घाट दूर होते हैं, इसलिए शव को वाहन में रखकर लेकर जाते हैं. पुजारी के अनुसार, उस समय नकारात्मक शक्तियां अपने सबसे ज्यादा प्रभाव में रहती है और पीछे चलने वाले लोगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. साथ ही कभी-कभी भूत-प्रेत समेत सबी नकारात्मक शक्तियां घर तक भी चली जाती हैं, जिससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
