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Janki Jayanti 2026: फाल्गुन मास की कृष्ण अष्टमी को आने वाली जानकी जयंती सिर्फ एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन को संतुलित करने का अवसर भी मानी जाती है. रोज़मर्रा की भागदौड़, बढ़ती जिम्मेदारियां और रिश्तों में आई उलझनें जब मन को भारी करने लगें, तब ऐसे पर्व हमें ठहरकर सोचने का मौका देते हैं. मान्यता है कि माता सीता की आराधना से जीवन में धैर्य, स्थिरता और सौम्यता आती है. 9 फरवरी 2026 को मनाई जाने वाली जानकी जयंती पर किए गए कुछ पारंपरिक उपाय आज भी लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उदाहरणों से जुड़े हैं. यही वजह है कि यह दिन आस्था के साथ-साथ उम्मीद का भी प्रतीक बन गया है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
जानकी जयंती केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि रिश्तों, धन और मानसिक शांति को संतुलित करने का अवसर है. श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.
जानकी जयंती का धार्मिक और सामाजिक महत्व माता सीता को भारतीय संस्कृति में त्याग, प्रेम और मर्यादा की प्रतिमूर्ति माना जाता है. वे केवल राम की अर्धांगिनी नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा हैं. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, आज भी कई परिवार जानकी जयंती को घरेलू शांति और रिश्तों की मजबूती से जोड़कर देखते हैं. बुजुर्गों का मानना है कि इस दिन की गई साधना मन को स्थिर करती है और निर्णयों में स्पष्टता लाती है.
जानकी जयंती पर किए जाने वाले प्रभावशाली उपाय वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए अगर पति-पत्नी के बीच बात-बात पर तनाव बढ़ रहा है, तो जानकी जयंती के दिन राम-सीता की संयुक्त पूजा करना शुभ माना जाता है. माता सीता को लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां और सुहाग की सामग्री अर्पित करें. कई महिलाओं का अनुभव है कि ऐसा करने से संवाद बेहतर होता है और गलतफहमियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.
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आर्थिक परेशानियों से राहत के लिए माता सीता को लक्ष्मी स्वरूप माना गया है. इस दिन महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ कर पीले फूल अर्पित करना और शाम को घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना आम उपाय है. छोटे दुकानदारों और नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि इससे मन में आत्मविश्वास बढ़ता है और खर्च-आय का संतुलन सुधरने लगता है.
विवाह में आ रही रुकावटों के लिए जिन युवाओं के विवाह में देरी हो रही है, वे “ॐ जानकीवल्लभाय स्वाहा” मंत्र का जाप कर सकते हैं. इसके साथ माता सीता को सुहाग का सामान अर्पित करना परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है. कई परिवारों में यह उपाय पीढ़ियों से अपनाया जा रहा है.
पारिवारिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए जानकी जयंती के दिन सुंदरकांड या रामायण के राम-सीता विवाह प्रसंग का पाठ घर के माहौल को हल्का और सकारात्मक बनाता है. जिन घरों में अक्सर तनाव रहता है, वहां यह पाठ आपसी समझ को मजबूत करने में सहायक माना जाता है.
आस्था के साथ संतुलन भी जरूरी यह जरूरी है कि इन उपायों को अंधविश्वास की बजाय आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ किया जाए. जानकी जयंती हमें सिखाती है कि धैर्य और संयम से बड़े-से-बड़े संकट भी पार किए जा सकते हैं. जब मन शांत होता है, तो समाधान अपने-आप दिखाई देने लगते हैं.
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