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उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर, यह मंदिर तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले, तांबरम के पास स्थित है. कहा जाता है कि अच्युत वर्मा राय ने स्वप्न में भगवान के दर्शन के बाद इस मंदिर का निर्माण करवाया था. मंदिर के गर्भगृह में एक दुर्लभ और अनोखी दो मुख वाली हनुमान प्रतिमा स्थापित है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना और दवा दोनों का सहारा लिया जाता है. शारीरिक कष्टों से छुटकारा पाने के लिए भक्त अलग-अलग मंदिरों में जाते हैं. तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में भगवान राम का ऐसा मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से शरीर के पुराने से पुराने रोगों से मुक्ति मिल जाती है. हम बात कर रहे हैं उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर की, जहां हनुमान अद्भुत रूप में विराजमान हैं. साथ ही इस मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि भगवान राम अपने तीनों भाइयों भाई लक्ष्मण, भाई भरत और भाई शत्रुघ्न के साथ गर्भगृह में विराजमान हैं, वह भी हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
दुनिया में नहीं है ऐसी प्रतिमा
तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में तांबरम के पास प्राचीन उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग श्री कोठंडा रामास्वामी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर अपने भव्य गोपुरम और सुंदर वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के गर्भगृह में प्रभु श्रीराम, मां सीता और लक्ष्मण विराजमान हैं. खास बात यह है कि मंदिर में हनुमान की दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा स्थापित है. कहा जाता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में किसी मंदिर में नहीं है.
मंदिर में हनुमान की दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा
मंदिर के गर्भगृह में हनुमान की दोमुख वाली प्रतिमा मौजूद है, जिसमें एक मुख प्रभु श्री राम, मां सीता और लक्ष्मण की तरफ है, जबकि दूसरा मुख दर्शन करने आने वाले भक्तों की तरफ है. माना जाता है कि शारीरिक रोगों से परेशान भक्त इस मंदिर में रोगों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं. हनुमान की दृष्टि मात्र से सारे कष्ट और रोगों का नाश होता है. मंदिर के गर्भगृह में भरत और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी मौजूद हैं. भरत और शत्रुघ्न दोनों कोनों में हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में विराजमान हैं. यह देश का पहला मंदिर है, जहां प्रभु श्री राम अपने तीनों भाइयों, मां सीता और अपने प्रिय भक्त हनुमान के साथ हैं.
भगवान विष्णु ने दिए थे निर्देश
मंदिर से जुड़ी प्रचलित किंवदंती की मानें तो इसका निर्माण विजयनगर वंश के अच्युत राय के आदेश के बाद हुआ था, जिन्हें स्वयं भगवान विष्णु ने दर्शन दिए थे. माना जाता है कि अच्युत वर्मा राय दिव्यांग थे और शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी. भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर सपने में अच्युत राय को दर्शन दिए थे और राम मंदिर बनाने का आदेश दिया था.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें
