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तीन दशक पहले बिहारीगढ़ के 50 परिवार गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे थे. न खेती का सहारा था और न कोई दूसरा रोजगार. ऐसे में उन्होंने पकौड़ी बनाने का काम शुरू किया.
बिहारीगढ़ की पकौड़ी खाने दूर-दूर से आते हैं लोग
सहारनपुर: यहां के बिहारीगढ़ का नाम सुनते ही पकौड़ियों की खुशबू और जायका याद आ जाता है. दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित इस छोटे से गांव ने अपनी खास पकौड़ियों के स्वाद से खुद को अलग पहचान दिलाई है. तीन दशक पहले शुरू हुई यह कहानी आज बिहारीगढ़ की पहचान बन चुकी है. यहां 40 से ज्यादा दुकानों पर रोजाना क्विंटल भर पकौड़ियां बनाई और बेची जाती हैं.
तीन दशक पहले बिहारीगढ़ के 50 परिवार गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे थे. न खेती का सहारा था और न कोई दूसरा रोजगार. ऐसे में उन्होंने पकौड़ी बनाने का काम शुरू किया. मेहनत और लगन का नतीजा यह हुआ कि उनकी कढ़ाई आज तीन पीढ़ियों बाद भी नहीं उतरी. बिहारीगढ़ की पकौड़ियां अब केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश तक मशहूर हैं.
क्या है खास पकौड़ियों में?
बिहारीगढ़ की पकौड़ियां मूंग की दाल से बनाई जाती हैं. इसके अलावा गोभी, बैंगन, मिर्च, प्याज, मेथी, और पालक की पकौड़ियां भी बेहद लोकप्रिय हैं. पकौड़ियों के साथ दी जाने वाली खास चटनी इनके स्वाद को और बढ़ा देती है. यहां की पकौड़ियों की कीमत इतनी किफायती है कि हर वर्ग के लोग इसका आनंद ले सकते हैं.
ग्राहकों का क्या कहना है?
ग्राहक रोशन लाल सैनी ने Bharat.one से बातचीत में कहा, “मैं पिछले 15 सालों से यहां की पकौड़ियों का स्वाद ले रहा हूं. जो एक बार इन पकौड़ियों को खाता है, वह दोबारा इन्हीं के लिए वापस आता है.” उन्होंने बताया कि यहां की दुकानों पर करीब 18 घंटे तक पकौड़ियां तली जाती हैं, और बड़ी मात्रा में इनकी बिक्री होती है.
बड़े नाम भी हैं फैन
बिहारीगढ़ की पकौड़ियां न केवल आम लोगों की पसंद हैं, बल्कि बड़े नेता और मंत्री भी यहां रुककर इनका स्वाद चखते हैं.
बिहारीगढ़ का स्वाद बना मिशाल
बिहारीगढ़ की यह कहानी सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेहनत, जरूरत और जज्बे का नतीजा है. यहां की पकौड़ियां हर उस शख्स के लिए प्रेरणा हैं जो कुछ बड़ा करने का सपना देखता है.
Saharanpur,Uttar Pradesh
January 15, 2025, 16:46 IST
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