ऋषिकेश: उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों की तरह यहां का खानपान भी बेहद अनोखा और स्वाद से भरपूर है. पहाड़ों में सरल जीवनशैली के बीच ऐसा भोजन पसंद किया जाता है जो देसी स्वाद, पोषण और मेहनत की थकान मिटाने वाला हो. इन्हीं पारंपरिक और लज्जतदार व्यंजनों में से एक है पहाड़ी भुटवा. भुटवा उत्तराखंड के गैरसैण, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और गांवों में खासतौर पर बनाया जाता है. यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि पहाड़ी संस्कृति, देसी अंदाज, पारंपरिक पकाने की विधि और मिलजुलकर खाने की सुंदर परंपरा का प्रतीक माना जाता है.
क्या होता है भुटवा
भुटवा का मतलब है बकरे की आंतों और अन्य आंतरिक अंगों से बना मसालेदार व्यंजन. यह व्यंजन ठंडे मौसम में शरीर को गर्माहट देता है और पहाड़ी लोगों के प्रिय पकवानों में से एक है.
कैसे बनती है भुटवा
भुटवा को बनाने की प्रक्रिया काफी खास और मेहनत वाली मानी जाती है. सबसे पहले बकरे की आंत और अन्य आंतरिक अंगों को नींबू, नमक और गर्म पानी से कई बार धोया जाता है ताकि गंध और अशुद्धियां पूरी तरह समाप्त हो जाएं. इसके बाद इन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर अलग रख दिया जाता है. पकाने के लिए लोहे की कढ़ाई या देसी हांडी का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें मसालों की खुशबू और स्वाद गहरा हो जाता है.
घीमी आंच पर तैयार होता है भुटवा
सबसे पहले तेल गर्म करके उसमें बारीक कटी प्याज, लहसुन, अदरक और हरी मिर्च डालकर अच्छी तरह भूनते हैं. जैसे ही मसाले सुनहरे होने लगते हैं, उसमें हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक मिलाया जाता है. चाहें तो इसमें पहाड़ी जाखिया या तिल भी डाला जा सकता है जो इस व्यंजन की असली पहचान माना जाता है. इसके बाद कटे हुए भुटवा को मसालों के साथ मिलाकर धीमी आंच पर भूनते हैं. भुटवा को धीमी आंच पर भूनना ही इसका सबसे अहम तरीका है क्योंकि धीरे पका मांस ज्यादा स्वादिष्ट और मसालेदार होता है. पकते-पकते जब भुटवा तेल छोड़ने लगे और मसालों की सुगंध फैलने लगे तो समझ लीजिए यह खाने के लिए तैयार है.
मसालेदार स्वाद, खुशबू और कुरकुरापन
ज्यादातर लोग इसे सूखा, कुरकुरा और मसालेदार पसंद करते हैं. पहाड़ों में इसे अक्सर गरम रोटी, मंडुवे की रोटी, चावल या चुल्हे पर बनी मक्के की रोटी के साथ परोसा जाता है. कुछ लोग इसमें टमाटर या ग्रेवी भी डालते हैं, ताकि इसे चावल या भात के साथ ज्यादा स्वाद लेकर खाया जा सके. कई जगह पहाड़ी लोग भुटवा को सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए भी खाते हैं. इसका देसी मसालेदार स्वाद, खुशबू और कुरकुरापन इसे घर के साथ साथ शादी, त्योहार और गांव की बैठकों में भी खास बनाता है.
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