गाजीपुर: गाजीपुर के पान की बात ही निराली है. यहां मिलने वाली पानों की विविधता देशभर में मशहूर है. इसी क्रम में साची पान, जिसकी हरी और मोटी पट्टी इसकी पहचान है, स्वाद में अद्वितीय है. वहीं, देसी पान, जो आकार में गोल और छोटा होता है, गाजीपुर में सबसे ज्यादा खाया जाता है. हालांकि गाजीपुर का सबसे खास पान है साची पान, जो गाढ़े हरे रंग का होता है जिसे देर तक चबाना पड़ता है. देशी पान जो गोल होता है इसका इसके स्वाद में कसैलापन होता है. इसी तरह आता है मगई पान. इसकी खासियत ये है कि यह इतना मुलायम होता है कि मुंह में डालते ही घुल जाता है और इसके लिए दांतों का इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ता.
संस्कृति और परंपरा में पान का महत्व
पान सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का हिस्सा भी है. पूजा-पाठ में पान का इस्तेमाल होता है और प्राचीन समय में पान के बीड़े का विशेष महत्व था. अलग-अलग संदेश देने के लिए बीड़े बनाए जाते थे—दुश्मनी जताने के लिए अलग बीड़ा और प्रेम जताने के लिए अलग. गाजीपुर में बनारसी पान भी मशहूर है, जिसमें केसर, लौंग और कस्तूरी का इस्तेमाल होता है. यह पान खासतौर पर बनारस के गोदौलिया क्षेत्र में लोकप्रिय है.
स्वास्थ्य और आयुर्वेद में पान की भूमिका
पान न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. आयुर्वेद में पान को पायरिया और मुंह के घाव ठीक करने में उपयोगी माना गया है. शोधकर्ता रामनारायण तिवारी बताते हैं कि पहले मोहिनी पान नृत्यांगनाओं के बीच लोकप्रिय था, जिसको खाने से मुंह लाल हो जाता था. जबकि मगही पान, जो गया और औरंगाबाद में उगाया जाता है, अपनी खुशबू और स्वाद के लिए जाना जाता है. गाजीपुर के पान की अपनी अनोखी पहचान है. यह न केवल स्वाद और संस्कृति का हिस्सा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी कई लाभ प्रदान करता है.
FIRST PUBLISHED : December 15, 2024, 09:15 IST
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